किसानों, बागवानों को फंसलो का लाभकारी मूल्य निर्धारित कर कृषि को बचाए सरकार-सुरेश ठाकुर
कहा-किसानों,बागवानों के छोटे-छोटे प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर उनको सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई

सुरेश ठाकुर को किसान संघ के प्रदेशाध्यक्ष की कमान उमेश सूद बने प्रदेश के महामंत्री
भारतीय किसान संघ में रामशिला से लेकर ढालपुर तक निकाली शोभायात्रा
किसान संघ ने कुल्लू में निकाली शोभायात्रा देशभक्ति के नारों से गूंजा कुल्लू शहर
न्यूज मिशन
कुल्लू
आरएसएस के अग्रणी संगठन भारतीय किसान संघ का प्रान्त अधिवेशन सम्पन हो गया है । दो दिवसीय इस अधिवेशन में जहां संगठनात्मक चिंतन हुआ वहीं नए पदाधिकारियों की ताजपोशी भी हुई है । कुल्लू के बाशिंग में आयोजित सम्मेलन में भारतीय किसान संघ की कमान सुरेश ठाकुर को सौंपी गई है । उन्हें संगठन ने महामंत्री से पदोन्नत कर अध्यक्ष बनाया है ।वहीं कुल्लू से तालुक रखने वाले उमेश सूद को प्रदेश के महामंत्री का दायित्व सौंपा है । प्रदेश महिला प्रमुख कुल्लू की डिंपल ठाकुर होंगी । युवा प्रमुख का जिम्मा अजीत सकलानी को दिया गया है ।उपाध्यक्ष पद पर रोशन चौधरी,डॉ जय देव कांगड़ा तथा प्रेम दत्त शास्त्री सोलन की ताजपोशी हुई है । ऊना से तालुक रखने वाले दिलवाग संगठन के कोषाध्यक्ष होंगे । सोलन के जयसिंह को प्रदेश का प्रचार प्रमुख बनाया गया है । प्रदेश संगठन मंत्री हरि राम पवार ने कहा कि नवनियुक्त अध्यक्ष ने प्रदेश कार्यकारिणी का गठन भी कर लिया है । उन्होंने कहा कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ सोम देव शर्मा अब राष्ट्रीय परिषद के सदस्य होंगे ।
भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने कहा कि 3 वर्षों के बाद प्रांत का सम्मेलन कल्लू के बासिंग में संपन्न हुआ है उन्होंने कहा दो दिवसीय सम्मेलन में किसने बागबान के विभिन्न मुद्दों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई है उन्होंने कहा कि आने बाली 3 वर्षों के लिए आगामी रूपरेखा तैयार की है उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में प्रदेश भर के 12 जिलों से 372 से अधिक पुरुषों महिला कार्यकर्ताओं ने भाग लिया है उन्होंने कहा कि किसने की फसलों पर लागत पर आधारित लाभकारी मूल्य किसने और बागवानों को फसलों पर एमएसपी के साथ 50% लाभ किसानों को मिले जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति अच्छी हो जाएगी उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे लोग खेती-बाड़ी छोड़ रहे हैं क्योंकि फसलों के उचित दाम न मिलने के कारण किसान आर्थिक तौर पर समृद्ध नहीं हो रहे हैं उन्होंने कहा कि जब तक सरकार किसानों को कृषि बागवानी के क्षेत्र में लाभकारी मूल्य घोषित नहीं करेगी तब तक किसने बागबानो को लाभ नहीं मिलेगा उन्होंने कहा कि 2017 से केंद्र सरकार ने किसानों को किसान सम्मन निधि शुरू की है लेकिन उससे भी किसानों को ज्यादा फायदा नहीं मिल पा रहा है क्योंकि 2018 से लेकर 2024 के बीच बीज और दवाइयां का मूल्य कई गुना बढ़ गया है जिसके चलते मजदूरी भी बढ़ गई है और ऐसे में किसान सम्मन निधि पर्याप्त नहीं है उन्होंने कहा कि सरकार खेती-बाड़ी को बचाने के लिए किसने बागवानों के लिए खाद बीज और दवाइयां का पैसा किसानों के खाते में सब्सिडी के रूप में दे दे जिससे खेती-बाड़ी को बढ़ावा मिलेगा और किसानों के छोटे-छोटे प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर उनका सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों बागबान ओके छोटे-छोटे ग्रुपों को का स्टोर जैसे सुविधा उपलब्ध करवाई उन्होंने कहा कि जब इस देश पर मुसलमान का अंग्रेजों का राज था तब भी इस देश में किसान बागवान कुशल थे और उस देश की जीडीपी चलती थी लेकिन आजादी के बाद से देश में खेती-बाड़ी को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से कोई ठोस बड़ी योजनाएं नहीं बनाई गई और जिसे आज जीडीपी 15% रह गई है उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे किस सरकार की तरफ देखने लगा और सरकार की तरफ से पंचवर्षीय योजना बनाई गई लेकिन किसने बागवानों को उसका फायदा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कृषि में सहकारिता बीज किसानों का अपना होता था और गोबर की खाद से उत्पादन होता था और किसानों को फायदा मिलता था लेकिन धीरे-धीरे अब सरकार ने बड़ी-बड़ी कंपनियों को बीज बेचने का लाइसेंस दिया जिसके बाद से हर साल कंपनियों के द्वारा किसानों को नए-नए किस्म का बीज दिया जा रहा है और खेतों में खातों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन काल में 1905 में बंगाल में अकाल पड़ा और उसके बाद भारतीय कृषि के उत्पादन में गिरावट हुई और आज भी सरकारी ब्रिटिश शासन काल की नीतियां चल रही है जिसके चलते देश में किसान खेती बाड़ी संकट के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना के समय भी सब काम बंद था और उसे वक्त देश की जीडीपी कृषि से ही चल चली और उसमें बढ़ोतरी हुई थी लेकिन उसके बाद भी सरकार की तरफ से बड़े-बड़े उद्योगपतियों के लिए योजनाएं बनाई और किसान के द्वारा तैयार उत्पाद की कीमत किसानों को कम और व्यापारियों को उद्योगपतियों को ज्यादा मिल रही है जिसके चलते आज देश में खेती-बाड़ी



