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सरकार कानून बनाकर नदी किनारे कुछ मीटर के दायरे में कंस्ट्रक्शन पर लगाई रोक -हितेश्वर सिंह
कहा- 1995 की बाढ़ के बाद भी सरकार ने करवाया था सर्वे नहीं बनाया ठोस कानून

ग्रामीण क्षेत्रों में लोक निर्माण विभाग की लापरवाही से सड़कों में निकालना लिया ना होने से लोगों के घरों और जमीनों को हुआ भारी नुकसान
न्यूज मिशन
कुल्लू
कुल्लू जिला में 3 दशकों के बाद भारी बारिश से जगह-जगह पर तबाही हुई है ऐसे में व्यास और पार्वती नदी के किनारे जगह जगह पर सैकड़ों मकानों,जमीनों और नेशनल हाईवे, फोरलेन व सड़कों के साथ-साथ जल शक्ति विभाग की विभिन्न परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है जिसके चलते सरकार को अब तक 800 करोड से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है। जबकि सैकड़ों करोड़ रुपए की निजी संपत्ति को नुकसान हुआ है सरकार की तरफ से आर्थिक राहत राशि के तौर पर अब तक 6:30 करोड़ रुपए की फौरी राहत प्रभावित परिवारों को बांटी गई है। व्यास और पार्वती नदी के किनारे बार-बार इस तरह के भारी नुकसान होने के कारण जहां लोगों को निजी संपत्ति का नुकसान हो रहा है वही सरकार को भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है ऐसे में सरकार को व्यास पार्वती नदी के किनारे कुछ मीटर के दायरे में कंस्ट्रक्शन पर कानून बनाकर रोक लगाने चाहिए जिससे भविष्य में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके इसके लिए सरकार को कानून बनाकर कंस्ट्रक्शन पर बैन लगाना चाहिए और नदी किनारे अवैध कब्जे को हटाकर नदी के क्षेत्र को तटीकरण कर रिहायशी इलाकों को सुरक्षित करना चाहिए।
वीओ- युवा नेता हितेश्वर सिंह ने कहा कि पिछले कई दशकों के मुकाबले इस बार ज्यादा बारिश हुई है भारी बारिश के चलते जगह जगह पर लोगों के घरों जमीनों को भारी नुकसान हुआ है उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोक निर्माण विभाग की सड़कों के किनारे विकास नालियां ना होने के कारण लोगों के खेतों में पानी से जगह-जगह पर भारी भूस्खलन हुआ है जिसके चलते लोगों के घरों और जमीनों को नुकसान हुआ है उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग की लापरवाही बरती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह जगह पर सड़क धंसने के कारण लोगों ने लोक निर्माण विभाग से डंगे लगाने का आग्रह किया था लेकिन वहाँ पर डंगे न लगाने से कई घरों को नुक्सान हुआ है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में लोग नाले के करीब बस गए हैं जहां पर कई वर्षों के बाद नाले में बाढ़ आने से नुकसान हुआ है उन्होंने कहा कि ऐसे में लोगों को भी नदी नालों से दूर रिहायशी मकान बनाना चाहिए जहां पर सुरक्षित हो सके उन्होंने कहा कि 19 95 की बाढ़ के बाद सरकार ने सर्वे किया था कि नदी किनारे कितने घर है उस सर्वे के बाद सरकार की तरफ से कोई ठोस नियम नहीं बनाया उन्होंने कहा कि सरकार को नदी के किनारे कुछ मीटर के दायरे में कंस्ट्रक्शन पर रोक लगाने चाहिए जिससे बार-बार बाढ़ के कारण भारी नुकसान हो रहा है उन्होंने कहा कि ऐसे में सरकार को नदी के दोनों तरफ कुछ मीटर तक का कंस्ट्रक्शन पर रोक लगाने के लिए कानून बनाना चाहिए जिससे भविष्य में जहां पर उस दायरे में लोगों की मलकीत भूमि है उसको सरकार की तरफ से किसी दूसरी जगह पर सरकारी भूमि में रिहायशी मकान बनाने के लिए जगा दें जिससे भविष्य में बार-बार भारी नुकसान ना हो जिससे सरकार को भी नुकसान हो उन्होंने कहा कि इस पर भी सरकार को गंभीरता से सोच विचार करना चाहिए ताकि भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके



