कुल्लू जनपत में वैरागी समुदाय 370 वर्षो से अवध, मथुरा वृंदावन की बृज भाषा में पारंपरिक होली के परंपरा कर रहे निर्वहन- एकादशी महंत
कहा- भगवान रघुनाथ मंदिर में होलाष्टक पर संध्या में बैरागी अपने डफ झांझ बजाकर गायन से करते है आरती

अटल सदन में भाषा संस्कृति विभाग एवं रूपी सराज कला मंच ने पारंपरिक लोक एवं होली गीत का आयोजन
न्यूज मिशन
कुल्लू
कुल्लू जिला मुख्यालय अटल सदन के सभागार के भाषा संस्कृति विभाग एवं रूपी सराज कला मंच के संयुक्त तत्वावधान में पारंपरिक लोक एवं होली गीत का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भाषा अधिकारी कुल्लू प्रोमिला गुलेरिया व रूपी सराज कला मंच के अध्यक्ष दयानंद गौतम ने सभी का स्वागत किया। वैरागी समुदाय के लोगों ने होली गीत गाकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया
बैरागी समुदाय के सदस्य एकादशी महंत ने कहा कि कुल्लू जनपद में बैरागी समुदाय के लोग पिछले 370 वर्षों से अवध मथुरा वृंदावन की तर्ज पर ब्रजभाषा में होली गायन की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी भी होली गायन की प्राचीन संस्कृति के संरक्षण के लिए मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ के आगमन से ही कुल्लू घाटी में बैरागी समुदाय के लोग आबाद मथुरा वृंदावन की संस्कृति को कुल्लू घाटी में संजय रखे हैं उन्होंने कहा कि कुल्लू में बसंत उत्सव से ही होली घाटी की परंपरा शुरू होती है और होलाष्टक में 17 फरवरी से लगातार होली तक जगह-जगह पर होली गायन का आयोजन किया जाता है उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ मंदिर में बैरागी समुदाय के लोग हर दिन शाम के समय प्राचीन होली की परंपरा का निर्वहन करते हैं और सभी बैरागी अपने डफों डफ की जोड़ियां आरती करते हैं। रुपी सराज कला मंच के अध्यक्ष डॉ दयानंद गौतम ने कहा कि भाषा एवं संस्कृति विभाग के द्वारा प्राचीन संस्कृति के संरक्षण संवर्धन के लिए पारंपरिक लोकगीत और होली गीत की प्रस्तुति की है उन्होंने कहा कि कुल्लू घाटी में 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध भगवान रघुनाथ के अवतरण के बाद से बैरागी समुदाय के लोगों के द्वारा भगवान राम कृष्ण की पारंपरिक होली गीत गाकर दर्शकों का मनोरंजन किया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्राचीन संस्कृति परंपरा को जीवंत और सहेज कर रखना।



