राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने दशहरा उत्सव की सांस्कृतिक संध्या का दीप प्रज्वलन कर किया शुभारंभ
लालचंद पार्टी कलाकेंद्र में पंजाब, हरियाणा,असम हिमाचल की संस्कृति की देखी झलक

विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का उद्घाटन कर किया अवलोकन
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने भगवान रघुनाथ से अस्थाई में पहुंच कर लिया आशीर्वा
लालचंद पार्टी कला केंद्र में पहली सांस्कृतिक संध्या रही फीकी
प्लेबैक सिंगर शाहिद मालिया का नहीं चला जादू कला केंद्र में अधिक तक कुर्सियां रही खाली
न्यूज मिशन
कुल्लू
अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने लालचंद प्रार्थी कला केंद्र से सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया इस दौरान राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने दीप प्रज्वलित कर सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया इस दौरान दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं सीपीएस सुंदर सिंह ठाकुर ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को कुलवी टोपी मफलर समिति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। रेस्टोरेंट राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने लालचंद प्रति कला केंद्र कुल्लू वीडियो को अपना संदेश दिया। लालचंद प्रार्थी कला केंद्र में रंग बिरंगी संस्कृति की झलक देखी जिसमें पंजाब हरियाणा असम हिमाचल प्रदेश के कलाकारों ने लोक संस्कृति की झलक दिखाई वही लालचंद पार्टी कला केंद्र की पहली सांस्कृतिक संध्या में स्टार कलाकार प्लेबैक सिंगर शाहिद माल्या ने दर्शकों का मनोरंजन किया केंद्र की पहली सांस्कृतिक संध्या फीकी रही इस दौरान प्लेबैक सिंगर शाहिद मलिका जादू नहीं चला और दर्शन दुर्गा में अधिकतर कुर्सियां खाली रही। रात 10:00 बजे तक लालचंद प्रति कला केंद्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम चला रहा।
वीओ- राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने लालचंद प्रार्थी कला केंद्र की पहली सांस्कृतिक संध्या के शुभारंभ पर कुल्लू वासियों को संबोधित करते हुए कहा कि
राज्यपाल ने कहा कि यह प्रदेशवासियों का सौभाग्य है कि कुल्लू की पवित्र भूमि में भगवान श्री रघुनाथ जी का वास है और यहां से उनका गहरा नाता है। उन्होंने कामना की कि भगवान श्री रघुनाथ जी का प्रदेशवासियों पर आशीर्वाद सदैव बना रहे ताकि हम इसी प्रकार अपनी देव संस्कृति को आगे बढ़ाते रहें। उन्होंने कहा कि यह उत्सव पर्यटन की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है और हमें इस दौरान लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करने के भी प्रयास करने चाहिए।
इसके उपरान्त, राज्यपाल ने विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और अन्य गैर सरकारी संगठनों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों का शुभारम्भ किया। उन्होंने इस अवसर पर लगाए गए स्टॉलों का भी अवलोकन किया और प्रदर्शनियों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता और गर्व की बात है कि मुझे आज कुल्लू की खूबसूरत घाटी में अन्तरराष्ट्रीय दशहरा महोत्सव के भव्य अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि अपनी समृद्ध संास्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्त्व के लिए प्रसिद्ध यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। सदियों से हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग रहे कुल्लू के इस अनूठे उत्सव नेे न केवल यहां की परम्पराओं को संजोकर रखा है बल्कि अपनी भव्यता के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान भी बनाई है।
उन्होंने कहा कि यह पवित्र त्योहार जहां एक ओर हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है वहीं रावण पर भगवान श्री राम की जीत, राक्षसों की पराजय और धर्म की पुनः स्थापना का स्मरण भी करवाता है। उन्होंने कहा कि अधर्म कितना भी बलशाली क्यों न हो अंत में जीत सत्य, न्याय और सदाचार की होती है।
राज्यपाल ने कहा कि भारत के अन्य भागों में जहां केवल एक दिन के लिए यह उत्सव मनाया जाता है वहीं कुल्लू में यह उत्सव सप्ताह भर चलता है और यहां देवभूमि के रीति-रिवाजों, कला और सामुदायिक भावना की शानदार झलक देखने को मिलती है। उत्सव के दौरान देवताओं की शोभा यात्रा, आकर्षक मेले और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी हिमाचल प्रदेश के लोगों के अध्यात्म और सांस्कृतिक विरासत के साथ गहरे संबंध को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है और यहां के वातावरण को स्वच्छ और संसाधनों को संजोकर रखना हम सभी का समान दायित्व है।
राज्यपाल ने कहा कि हमें विश्वास है कि यह त्योहार समाजिक एकता को मजबूत करने, राज्य में समृद्धि लाने और हमें एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि देवभूमि में नशे के लिए कोई भी स्थान नहीं है और इसे जड़ से उखाड़ने के लिए सभी को एक साथ आगे आना चाहिए ताकि राज्य का वातावरण स्वस्थ बना रहे।इस अवसर पर जिला कुल्लू के विभिन्न क्षेत्रों से 300 से अधिक देवता भाग ले रहे हैं।
– उपायुक्त कुल्लू एवं उपाध्यक्ष दशहरा उत्सव समिति तोरूल एस रवीश ने लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का दशहरा उत्सव में मुख्यतिथि आने पर आभार जताया।उन्होंने कहाकि दशहरा उत्सव देवसंकृति को समर्पित है और यहां पर देवसंस्कृति के संरक्षण संवर्दन के लिए प्रयास किए गए है और दशहरा उत्सव के लिए 332 देवी देवताओ को निमंत्रण भेंजे है और इस दशहरा उत्सव में देश् विदेशा के कलाकार अपने संस्क़ृति प्रदर्शित करेंगे जिससे संस्कृति आ आदान प्रदान हो रहा है।
आसाम की कलाकार सागरिका ने कहाकि अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू उत्सव में कई राज्यों के कलाकार अपने लोक संस्कृति दिखा रहे है।उन्होंने कहाकि हमने आसाम का विहु नृत्य प्रस्तुत किया है और यहां पर संस्कृति का आदान प्रदान हो रहा है।



