भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का आगाज
दशहरा उत्सव में भाग लेने करीब 3सौ से अधिक देवी देवता
भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का आगाज
दशहरा उत्सव में भाग लेने करीब 3सौ से अधिक देवी देवता
हजारों लोगो न खींचा भगवान रघुनाथ का रथ
राज परिवार के सदस्यों ने प्राचीन परंपरा का किया निर्हवन
7 दिनों तक भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर में होगी विधिवत पूजा अर्चना
न्यूज मिशन
कुल्लू
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला में विश्व प्रसिद्ध अन्तर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव ऐतिहासिक रथ मैदान में सैंकड़ो देवी देवताओं के आगमन के साथ भगवान रघुनाथ की पारंपारिक रथयात्रा हुई।भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा के साथ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का आगाज हो गया है। 7 दिनों तक ऐतिहसिक ढालपुर में 19 अक्तुबार तक दशहरा उत्सव चलेगा।धार्मिक नगरी सुल्तानुपर भगवान रघुनाथ दोहपर करीब बजे 2 भगवान रघुनाथ अपनी पालकी में सवार होकर देवता बिजली महादेव,माता त्रिपुरा सुंदरी व देवता जम्दगनि व देवता लक्ष्मी नारायण सहित दर्जनों देवी देवता भव्य शोभायात्रा शुरू हुई। जिसके बाद करीब 1 घंटे शहर में भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी और शोभायात्रा में श्रद्वालुओं ने जय श्रीराम के उद्वघोष के साथ ऐतिहसिक रथ मैदान में पहुंची जहां पर भगवान रघुनाथ को रथ में बैठाकर मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने विधवित पूजा अर्चना के साथ भगवान रघुनाथ की आरती और परिक्रमा कर देव रस्में निभाने के बाद जैसे ही साथ लगी पहाड़ी से माता भुवनेश्वरी ने रथ यात्रा को झंडी दिखाई तो वैसे ही रथ यात्रा शुरू हुई। हजारों लोगों ने रस्सों के सहारे खींचा और इसके साथ ही रथ के दोनों तरफ देवी देवता भी अपने हारियानों के कंधों पर रथ के साथ चले। मौके पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं सीपीएस सुंदर सिंह ठाकुर, मौजूद रहे।
-गौर रहे कि घाटी में देवताओं की दादी की जाने वाली माता हिडिंबा की अहम भूमिका होती है, उसके बगैर दशहरा उत्सव अधूरा माना जाता है। कुल्लू के राज दरबार के साथ देवी हिडिंबा का इतिहास है। देवी हिडिंबा ने ही कुल्लू के प्रथम राजा विहंगमणिपाल को गांव में आतंक फैलाने वाले पीति ठाकुरों का नाश करके उन्हें राजा बनाया था।अतंर्राष्ट्रीय दशहरा उत्सव के इतिहास के मुताबिक दशहरा उत्सव में सबसे अधिक 365 देवी देवताओं की उपस्थिति लगी है हालांकि देवताओं की संख्या समय अनुसार घटती और बढ़ती रही है । किस वर्ष दशहरा उत्सव में करीब 300 देवी देवता भाग ले रहे हैं(
वीओ- राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि भारत वर्ष में अद्वभुत है कुल्लू दशहरा उत्सव।उन्होंने कहाकि दशहरा दिल्ली में भी होता है और वहां पर रावण का पुतला का दहन होता है और कुल्लू में दशहरे पर भगवान राम के दर्शन होते है।उन्होंने कहाकि भगवान रघुनाथ कुल्लू मे विराजमान है पूरे हिमाचल के लिए यह गौरव की बात है।उन्होने कहाकि मैं प्रभु से कामना करता हूं देवभूमि हिमाचल को सुरक्षित रखें और देवभूमि की परंपरा को का पालन करें।उन्होंने कहाकि देवभूमि कुल्लू में देव समागम को देखकर कोई भी अभिभूत हो सकता है और मै इसका साक्षी बना हूं मैं सौभाग्यशाली हूं ।उन्होंने कहाकि पर्यटन को बचना है और सुद्वता रखनी है तो हिमाचल को नशा मुक्त रखना है।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहाकि कुल्लू दशहरा उत्सव देवताओं का समागम है और यहां सैंकड़ो देवी देवताओं कके मिलन से देवमय महौल है।उन्होंने कहाकि संस्कृति को बढ़ाबा देता है और यहां पर इस बार देश विदेश की संस्कृति दिखेगी ।उन्होंने कहाकि कई सांस्कृतिक दल 7 दिनों तक संस्कृति प्रस्तुत करेंगे।
वीओ-मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहाकि भगवान रघुनाथ की रथयात्रा भगवान रघुनाथ ने आज लंंका पर चढ़ाई की है।उन्होंने कहाकि भगवान रघुनाथ अपने अस्थाई शिविर में 7 दिन तक रहेंगे।उन्होंने कहाकि 6 दिन देवी रूप की पूजा अर्चना होगी।उन्होंने कहाकि लंका दहन के 1दिन पहले दुर्गा पूजा करते है औ माता त्रिपुरा सुंदरी के कारकून उस परंपरा को निभाते है।



