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भगवान रघुनाथ को सप्ताह में  रेशम के 5 रगों के वस्त्रों  होता है हार श्रृंगार- महेश्वर सिंह

कहा-सोमवार और शुक्रवार को सफेद, मंगलवार और रविवार को लाल वीरवार को पीले रंग बुधवार को हरा,शनिवार को नीला रंग ल पहनाते है वस्त्र

माता सीता को अंगवस्त्र नहीं बाहर के वस्त्र पहनाए जाते है
भगवान रघुनाथ के वस्त्र बग्गा रियासत के राजा को लगाया जाता है
नरसिंह भगवान के उतारे वस्त्र फरगल  वीआईपी, मंत्री औऱ अधिकारियों लगाए जाते है
वैष्णो धर्म में भगवान राम की पूजा पद्धति सिर्फ कुल्लू में ही प्रचलित अयोध्या में भी नहीं रही प्राचीन पूजा पद्धति
न्यूज मिशन
कुल्लू
अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के चौथे दिन भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर में सुबह प्रातः पूजा और उसके बाद बड़ी पूजा में भगवान रघुनाथ माता सीता शालिग्राम नरसिंह भगवान और हनुमान सहित सभी का विधिवत मंत्र उच्चारण के साथ हरसिंगार किया गया इस दौरान बड़ी पूजा में भगवान रघुनाथ का विधिवत स्नान किया गया। इसमें दूध दही शहर शक्कर पांच अमृत के साथ स्नान किया गया उसके बाद भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ी बरदार महेश्वर सिंह ने  भगवान रघुनाथ, को वस्त्र पहनकर  हार श्रृंगार  किया। भगवान रघुनाथ के स्थाई क्षेत्र में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे भगवान रघुनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया इस दौरान भगवान नाथ के स्थाई शिविर में भजन कीर्तन से माहौल भक्ति में हुआ।
वीओ- भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ी प्रकार महेश्वर सिंह ने कहा कि भगवान रघुनाथ को दो बस्तर हर दिन पहनाए जाते हैं उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ को बाहर के हिसाब से वस्त्र बनाए जाते हैं जिसमें सोमवार को सफेद बस्तर मंगलवार को लाल बस्तर बुधवार को हर बस्तर गुरुवार को पीला शुक्रवार को सफेद शनिवार को नीला रविवार को लाल बस्तर पंचायत जाते हैं उन्होंने कहा कि सभी भगवान को श्रृंगार वस्त्र भी एक सपना जाता है उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ को भोग के पास अलग बस्तर लगाया जाता है जिसमे गोटा नहीं होता है। जो रेशम का वस्त्र पहनाया, उन्होंने कहा कि माता सीता अंग वस्त्र नहीं लगता है बाहर का वस्त्र लगता है।हनुमान जी अंग वस्त्र सफेद और बाहर का वस्त्र रंगदार लगता है।
उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ के  उतरा हुआ वस्त्र बग्गा किसी रियासत के राजा को बग्गा लगता है। उन्होंने कहा कि हमारे परिवार में बच्चों को बग्गा नहीं लगता है और नरसिंह भगवान का फरगल लगता है। और उसी तरह किसी भी वीआईपी ,मंत्री या कोई भी बड़ा अधिकारी आए उसको  नरसिंह भगवान का उतारा हुआ वस्त्र  फरगल लगया जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ के पुजारी ब्राह्मण हो वह नहीं चलता लेकिन जो पुजारी का परिवार है उसमें ही भगवान रघुनाथ का पुजारी बनता है। उन्होंने कहा कि अब भगवान रघुनाथ की पूजा पद्धति अयोध्या में भी नहीं है और राजा जगत सिंह जब कुष्ठ रोग की मोक्ष के लिए भगवान रघुनाथ जी को कुल्लू लाए थे उसे वक्त पूजा पद्धति भी लिखित रूप में यहां पर लाई थी उन्होंने कहा कि दामोदर के द्वारा जो प्रद्धति  लाए थे उन्होंने कहा कि दुर्गा की भगवान के उठने से लेकर सो जाने और नहाने हरसिंगार भोग और सोने तक मंत्र के साथ विधिवत रूप से पूजा अर्चना की जाती है उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि वैष्णव धर्म में विजयदशमी दशमी के दिन जब दशमी छूट जाती है अर्थात दशमी शुरू होने के बाद खत्म होने पर रथ यात्रा की जाती है लेकिन कुल्लू जिला में इस बार वैष्णव धर्म में मंदिरों में भी दशमी जिस दिन कुल्लू में भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा होती है उसी दिन और नगर ठावा दशमी होती है उन्होंने कहा कि मणिकरण में विजयदशमी पर रथ यात्रा 12 अक्टूबर को ही की गई जो की 13 तारीख को होनी चाहिए थी
वीओ- श्रद्धालु जय शर्मा ने कहा कि भगवान रघुनाथ के स्थाई शिविर में दर्शन के लिए आए हैं और भगवान रघुनाथ की पूजा अर्चना भजन कीर्तन में शामिल हुए हैं उन्होंने कहा कि कुल्लू दशहरा उत्सव में सैकड़ो देवी देवता यहां पर पहुंचे हैं और इस दशहरा देव महाकुंभ में देवी देवताओं और भगवान रघुनाथ के दर्शन कर अच्छा लग रहा है और परिवार की सुख समृद्धि की कामना की है
 श्रद्धालु हेमलता शर्मा ने कहा कि कुल्लू दशहरा उत्सव में भगवान रघुनाथ के दर्शन और समस्त देवी देवताओं के दर्शन करने का अवसर मिला है उन्होंने कहा कि यहां पर माहौल भक्ति में है और चारों तरफ देवी देवताओं के मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे हैं और 7 दिनों तक यहां पर देवी देवताओं के मंदिर में पूजा अर्चना सेभक्तिमय माहौल है।

 

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