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राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर सेब के समर्थन मूल्य के लिए बजट का प्रावधान नहीं किया -पूर्ण ठाकुर

कहा, मंडी मध्यस्थ योजना के तहत 29 बिंदुओं निर्धारित करने पर बागबानो हो रही भारी समस्या

एपीएमसी बागवानों के सेब 51 एमएम के साइज का सेब नहीं ख़रीदगी बागवानों को सता रही चिंता
किसानों, बागवानों पर पड़ रही दोहरी मार प्राकृतिक आपदा से फँसले खराब सरकार की नीतियों का आर्थिक नुकसान
न्यूज मिशन
कुल्लू
हिमाचल प्रदेश में सेब की आर्थिकी की 6000 करोड़ से अधिक है ऐसे में बागबानों को दोहरी मार झेल रहे हैं एक तरफ जहां प्राकृतिक आपदा से फंसले खराब होने के कारण पैदावार कम हुई है वहीं दूसरी तरफ सरकार की नीतियों से भी बागबानो को नुकसान हो रहा है जिससे बागवानों को चिंता सता रही है।सरकार ने एमआईएस मंडी मध्यस्ता योजना के तहत बजट का प्रावधान नहीं किया जिसके चलते अब हिमाचल सरकार ने निर्णय लिया है कि 51 एमएम से छोटा साइज बाला सेब सरकार नहीं खरीदेगा और ऐसे में बागवानों को इससे बड़ा झटका लगा है जिससे अब बागबानो को दोहरी मार झेलनी पड़ेगी।
हिमाचल सेब उत्पादक संघ के राज्य सचिव पुराण ठाकुर ने कहा कि जो सरकार ने मिस मार्केट इंटरवेंशन स्कीम मंडी मध्यस्थ योजना के तहत सरकार सब खरीदनी थी उसका भुगतान देरी से किया गया उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार 50 50% के हिसाब से भुगतान करती थी उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए पिछले वर्ष के बजट में कोई प्रावधान नहीं किया उन्होंने कहा कि सरकार ने 24-25 के बजट में सिर्फ मात्र टोकन मनी के रूप में एक लाख रुपए का बजट का प्रावधान किया है उन्होंने कहा कि यह पर्याप्त बजट नहीं। उन्होंने कहा कि 1988 -89 किसानों आंदोलन किया था और उस आंदोलन में चार किस भी शहीद हुए थे उन्होंने कहा कि उसके बाद एमआईएस मंडी मध्यस्थ योजना लागू हुई थी और हिमाचल प्रदेश में सेब की फसल में पहली बार समर्थन मूल्य निर्धारित हुआ था। जिसके तहत सेब का छोटा साइज एचपीएमसी,हिम फैड के द्वारा बागबानो से खरीदा थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने तानाशाही फैसला अपनाते हुए 29 पॉइंट निर्धारित किए हैं जिससे लगता है कि सरकार की मंशा किसान और बागवान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से आग्रह है कि मंडी मध्यस्थ योजना के तहत एमआईएस 1989 के यथासंभवम लागू रखें अन्यथा हिमाचल सेब उत्पादक संघ बागबानों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ सड़कों पर संघर्ष और आंदोलन करेंगे उन्होंने कहा कि यह सरकार ने तय करना है कि सरकार बागवानों के साथ खड़ी है या पूंजीपतियों के साथ खड़ी है उन्होंने कहा कि बागबान और किस जिंदा रहे उसके लिए फसलों का समर्थन मूल्य निर्धारण किया गया था उन्होंने कहा कि मंडी मध्यस्थ योजना के तहत सरकार को बागबानो के लिए समर्थन मूल्य के हिसाब से बजट में प्रावधान करना चाहिए था ताकि किसान बागवान जिंदा रहे । तूने कहा कि किसने बागबानो पर दोहरी मार पड़ रही है एक तरफ जहां प्राकृतिक आपदा के चलते फसल खराब हो रही है दूसरी तरफ बाजार में दाम कब मिलने से किसने बागबानो नुकसान उठाना पड़ रहा है उन्होंने कहा कि सब की खेती घाटे का सौदा साबित हो रहा है उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में किसानों की आय दुगनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन आज किसान बागबान का लागत मूल्य बढ़ने से आमदनी घट रही है और किसानों, बागवानों की आर्थिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ रहा है उन्होंने कहा कि अब सरकार ने यह फैसला लिया है कि 51 म से काम साइज का सब सरकार नहीं खरीदेगा हमने कहा कि यह भी किसान बागबान के लिए एक चिंता का विषय है कि ऐसे में मौसम की मार किसानों पर पड़ी और फसल भी काम है और दूसरी तरफ साइज भी छोटा है और ऐसे में किसने बागबानो को और नुकसान होने की चिंता सता रही है

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