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देवता गुग्गा जाहर पीर निसंतान को संतान का आशिर्वाद देते है-धीरज शर्मा

कहा- रक्षाबंधन से शुरू होकर जन्माष्टमी पर खत्म होती है देवता गुग्गा जाहर पीर धार्मिक की यात्रा

देवता गुग्गा जाहर पीर सैकड़ो श्रद्धालुओं लाव लश्कर के साथ धार्मिक यात्रा में भक्तों की मनोकामना कर रहे पूरी
न्यूज मिशन
कुल्लू

देवभूमि कुल्लू जिला में देवता गुग्गा जाहर पीर लोरन अपनी धार्मिक यात्रा पर रक्षाबंधन से निकले हुए हैं इस दौरान देवता ने उझी घाटी में कई श्रद्धालुओं के निमंत्रण पर लाव लश्कर के साथ पहुंच कर आशीर्वाद दिया इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देवता से आशीर्वाद लिया और उसके बाद देवता अब भुंतर और वर्षा घाटी की धार्मिक यात्रा पर निकले हैं जहां पर सैकड़ो श्रद्धालुओं लाभ लश्कर के साथ कुल्लू से भुंतर की तरफ धार्मिक यात्रा में सैकड़ो श्रद्धालुओं भाग ले रहे हैं। मान्यता है कि देवता श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी करते हैं जिससे देवता के प्रति आस्था लगातार बढ़ रही है और मान्यता यह भी है कि जिन लोगों के संतान नहीं होती उनको देवता संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं जिसके चलते लोगों में देवता गुग्गा जाहर पीर के प्रति आस्था में बढ़ोतरी हो रही है यह यात्रा जन्माष्टमी के त्योहार पर संपन्न होगी

देवता गुग्गा जाहर के कारदार धीरज शर्मा ने कहा कि देवता गुग्गा जाहर पीर की धार्मिक यात्रा रक्षाबंधन से शुरू होती है और जन्माष्टमी के त्यौहार पर संपन्न होती है उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी के दिन माता भुवनेश्वरी के दरबार में हाजिरी भरते हैं और उसके बाद देवता वापस मंदिर में पहुंचकर शाम को छत्तर ढाल का कार्यक्रम के साथ यात्रा संपन्न होती है उन्होंने कहा कि दूसरे दिन गुग्गा नवमी का त्यौहार मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के दिन यह धार्मिक यात्रा शुरू होती है जिसके बाद सबसे पहले भगवान रघुनाथ के मंदिर में पहुंचते हैं और उसके बाद जहां भी देवता को निमंत्रण दिया जाता है वहां वहां पर यह धार्मिक यात्रा जाती है और सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रीतिभोज का आयोजन किया जाता है उन्होंने कहा कि देवता गुग्गा जाहर की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है उन्होंने कहा कि देवता सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी करते हैं उन्होंने कहा कि जिनको बच्चें नहीं होते है उनको लिए संतान की प्राप्ति आशीर्वाद देवता देते हैं इसलिए हर साल देवता की आस्था बढ़ रही है उन्होंने कहा कि आज देवता भुंतर की तरफ निमंत्रण पर जा रहे हैं और उसके बादः5 गड़सा घाटी में निमंत्रण पर जाएंगे। और 26 अगस्त को जन्माष्टमी पर देवता देवालय लौटेंगे और धार्मिक यात्रा पूरी होगी।

स्थानीय श्रद्धालु अरुण शर्मा ने कहा कि देवता गुग्गा जाहर पीर की यात्रा हर साल रक्षाबंधन से लेकर जन्माष्टमी तक होती है उन्होंने कहा कि इस यात्रा में देवता जहां पर भी श्रद्धालुओं के द्वारा निमंत्रण दिया जाता है और उनके घर द्वार पर जाकर देवता आशीर्वाद देते हैं उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से देवता धार्मिक यात्रा पर उझी घाटी,भुंतर, गड़सा घाटी में श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद देते हैं उन्होंने कहा कि इस यात्रा में बच्चे बूढ़े युवा बढ़ चढ़कर भाग लेते हैं और दिन-रात इस यात्रा में अपना सहयोग देते हैं और देवता उनका आशीर्वाद देते हैं।

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