जनेऊ में कुछ तो शक्ति है यूं ही नहीं औरंगजेब जनेऊ निकालने के लिए बाध्य हुआ था -मनमोहन गौतम
कहा-सनातन संस्कृति में जनेऊ का महत्व धीरे-धीरे हो रहा खत्म

सनातन के 16 संस्कारों की हर व्यक्ति को होनी चाहिए जानकारी
भुंतर के राधा कृष्ण मंदिर में हिमाचल प्रदेश ब्राह्मण कल्याण सभा ने पहली बार किया यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार का आयोजन
न्यूज मिशन
कुल्लू
हिमाचल प्रदेश ब्राह्मण जन कल्याण सभा ने कुल्लू जिला में पहली बार यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार का आयोजन किया ।जिसमें 10 ब्राह्मण कुमारों ने विधिवत पूजा अर्चना कर जनेऊ के महत्व और सनातन संस्कृति के महत्व की जानकारी ली। और गुरु धारण करके सनातन धर्म 16 संस्कार के बारे में जाना।यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
हिमाचल प्रदेश ब्राह्मण कल्याण सभा के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन गौतम ने कहा कि सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार ज्ञानवर्धन के लिए सामूहिक यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार का आयोजन किया जिसमें ब्राह्मण कुमारों जनेउ के महत्व और सनातन संस्कृति के महत्व की जानकारी दी। और गुरु धारण करके सनातन धर्म के प्रति अवगत करवाया उन्होंने कहा कि व्यास और पार्वती नदी के संगम स्थल भुंतर राधा कृष्ण मंदिर में इस धार्मिक आयोजन किया जा रहा है उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में 16 संस्कारों की हर व्यक्ति को जानकारी होनी चाहिए उन्होंने कहा कि सनातन जीवन जीने की एक पट्टी है नियम है ऐसी पद्धति जिसमें शरीर को जीवन को सुख मन को खुशी आनंद मिलता है उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में ऋषि मुनियों ने 16 संस्कारों की खोज की है उन्होंने अनवरत प्रयास किया है इस समाज की खुशहाली बार शांति जन कल्याण के लिए जो नियम दिया है उसका पालन करने 16 विधियां दी है।जिसके लिए यज्ञोपवीत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है उन्होंने कहा कि मनुष्य जब जन्म लेता है तो माता-पिता और पूर्वजों के प्रति उसका श्रद्धा भाव का रन रहता है उन्होंने कहा कि दूसरा ऋषि ऋण जो सुविधाओं का आनंद आज मानव ले रहा है ऋषियों की तपस्या और साधना से जुटा है उनके प्रति हमारी सदा आप रहे देवरान धर्म और अध्यात्म के प्रति जो मार्गदर्शन दिया है उसके प्रति मानव का श्रद्धा भक्ति बनी रहे उन्होंने कहा कि जनेऊ को जब धारण करेंगे तो हमेशा जनेऊ धारण के समय जो गुरु धारण करते हैं गुरु धारण करते है वह जनेऊ के महत्व को बताते हैं। उसका पालन करना है उन्होंने कहा कि ब्रह्मा विष्णु महेश के प्रति जानू में बताया गया है कि सृष्टि के रचयिता जिसे हम उपभोग कर रहे हैं उनके प्रति हमारी श्रद्धा और आस्था सकारात्मक भाव हमेशा बना रहे। उन्होंने कहा कि आज सनातन संस्कृति में जनेऊ का महत्व धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और जनेऊ को औपचारिकता के नाते बांध रहे हैं जो सनातन हरास का कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि जनेऊ हमेशा अवगत करवाता है कि युगों में एक अच्छा जीवन जीना है और समाज में तभी खुशहाली और शांति होगी जब भातृक भाव एक दूसरे से मिलते जुड़ते आगे बढ़ते हैं उन्होंने कहां की हिमाचल प्रदेश ब्राह्मण कल्याण सभा ने यह बीड़ा उठाया है कि यज्ञ प्राइवेट संस्कार हर वर्ग के लिए शास्त्र अनुसार किया जाए कुल्लू जिला में यह पहला प्रयास है जिसके लिए मैं आभार प्रकट करता हूं उन ब्राह्मण कुमारों का जिन्होंने सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार करने के लिए जनेऊ धारण करने के लिए इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा कि आने वाले समय में भी यज्ञोपवीत संस्कार को सार्वजनिक तौर पर शास्त्रों पर कैसे कर सकते है। किया जाएगा उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ब्राह्मण कल्याण सभा ने कर्मकांड और ज्योतिष पर भी गठन हुआ है और उनसे विनती की है कि शत्रु का अध्ययन करें और यज्ञोपवीत संस्कार के लिए जागरूकता बनी रहे उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब औरंगजेब ने देश में आक्रमण किया और उसे वक्त उन्होंने देखा कि जब हथियार और धन लूटने से भारतीय बरमुख है। उन्होंने कहा कि जब तक एक मण जनेऊ इकट्ठा नहीं करेगें तब तक मैं भोजन नहीं ग्रहण करूंगा।उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि आखिर इस जनेऊ में कुछ तो है इस जनेऊ को पाने के लिए औरंगजेब भी बाध्य होता है। उन्होंने कहा कि सभी ब्राह्मणों को सनातनी ऋषि मुनियों की खोज है वह ब्राह्मण समाज के पास है और ब्राह्मण इस समाज को देने में असफल हो रहे हैं उन्होंने कहा कि इसमे में कहां कमी रह गई है उसको खोजने की जरूरत है और समाज इसके लिए कैसे जागरूक हो इसके लिए भी प्रयास कर रहे हैं



