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केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों बागवानों के पैकिंग मैटीरियल,दवाइयां और खाद को जीएसटी मुक्त करें-राकेश सिंघा

कहा-किसान, बागवानों पैकिंग मैटीरियल खरीदने के लिए जीएसटी के सहित पैसे खरचते है तो जीएसटी रिकवरी का लाभ कंपनियां क्यों

न्यूज मिशन
कुल्लू

हिमाचल किसान सभा के पूर्व महासचिव किसान और मजदूर नेता राकेश सिघा ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा हाल ही में केंद्र सरकार के द्वारा किसने बागबान के उत्पादों के लिए उपयोग होने वाले पैकिंग मैटेरियल पर 18% से जीएसटी घटकर 12% किया है इससे बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा उन्होंने कहा कि आज देश में किसान बागबान देश की रीड की हड्डी है ऐसे में अगर किसान बागबान एन और फल फ्रूट पैदा नहीं करेगा तो देश जिंदा कैसे रहेगा निकाह की इसलिए सरकार को किसने बागवानों के उत्पाद की पैकिंग पर उपयोग होने वाले पदार्थ को जीएसटी मुक्त कर देना चाहिए इसके अलावा चाहे कीटनाशक दवाइयां और खाद पर भी जीएसटी खत्म कर देना चाहिए उन्होंने कहा कि किसान बागवान जीएसटी खर्च कर पैकिंग मैटेरियल खरीदना है और पैकिंग मैटेरियल निर्माण करने वाली कंपनी जीएसटी क्लेम करती है उन्होंने कहा कि ऐसे में जब किसान जीएसटी खर्च कर पैकिंग मैटेरियल उपयोग करता है तो जीएसटी भी किस को ही क्लेम करने का अधिकार होना चाहिए ।उन्होंने कहा कि कंपनियां जीएसटी क्लेम कर रही है। इसको खत्म कर देना चाहिए उन्होंने कहा कि आज हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती भी संकट के दौर से गुजर रही है उन्होंने कहा कि इसलिए केंद्र और प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि किसने बागबानो के उत्पादों की पैकिंग मैटेरियल और दवाइयां व खाद पर जीएसटी को मुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार किसने बागबानो की बात तो सुनती है लेकिन पुरानी सरकार तो किसने बागवानों की बात भी नहीं सुनती थी और लड़ाई ही लड़ाई होती रहती थी उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि वह हमारी स्पेशल स्कोर टेस्ट ना करें ऐसे में हमने सरकार को समय दिया है उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश कांग्रेस सरकार का रवैया भी पुरानी भाजपा सरकार की तरह रहेगा तो किसने बागबानो के हक में सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार पूरे प्रदेश में सभी किसान संगठन एक जुट है और केंद्र सरकार से किसने बागबान की फसलों के लिए एसपी की मांग कर रहे हैं ऐसे में आने वाले समय में सभी किसान संगठन एक जड़ता के साथ विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन करेंगे

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