भगवान रघुनाथ ,शालीग्राम,नरसिंह और हनुमान भगवान ने किया मंत्रोचारण के साथ जल विहार में स्नान
जल विहार उत्सव में पुजा अर्चना के साथ भगवान रघुनाथ ,शालीग्राम,नरसिंह और हनुमान भगवान हुआ श्रृंगार

चतुरमासा तक भगवान रघुनाथ शाम के समय झुलेगें झूला
शाम पांच बजे के बाद चार माह तक होगें भगवान रघुनाथ के दर्शन
बर्षभर भगवान रघुनाथ के 46 उत्सव का होता है आयोजन
पांच उत्सवो में भगवान रघुनाथ निकलते है मंदिर से बाहर
न्यूज मिशन
कुल्लू
देवभूमि कुल्लू जिला के आराध्य देव भगवान रघुनाथ जी के मन्दिर में जल विहार उत्सव मनाया गया।इस मौके पर भगवान रघुनाथ जी की पूजा अर्चना की गई व उसके बाद मन्दिर में दर्शनों के लिए आए सैंकड़ों भक्तों द्वारा भगवान रघुनाथ जी का भजन कीर्तन करके गुणगान किया गया।उसके बाद भगवान रघुनाथ जी को परिवार सहित पालकी में विराजमान करके आयोजन स्थल तक ले जाया गया।इस मौके पर रघुनाथ जी के प्रथम सेवक महेश्वर सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।आयोजन स्थल पर मन्दिर के पुजारी भाटु द्वारा भगवान रघुनाथ हनुमान शालीग्राम और नरसिंह भगवान सहित सभी मूर्तियों को स्नान के बाद श्रृंगार किया गया।उत्सव के समापन के बाद बच्चों द्वारा आयोजन स्थल पर पानी में खूब अठखेलियां की गई।
मुख्य छड़ीवरदार महेशवर सिंह ने कहाकि रघुनाथ मन्दिर में दशहरा, बसन्त ,अन्न कूट ,वन बिहार, की तरह जल बिहार उत्सव मन्दिर में मनाए जाने वाले मुख्य उत्सवों में से एक है।भगवान रघुनाथ जी को जल बिहार उत्सव के बाद उनके गर्भ गृह में विराजमान किया जाता है निर्जला एकादशी के दिन भागवान रघुनाथ अपने मंदिर से बाहर निकलते है। और भगवान रघुनाथ जल विहार में तलाब में स्नान करते है। और उस जल को लोगों चलामत के तौर पर प्रयोग करते है। और छोटे बड़े इस तलाब में स्नान करते है।उन्होंने कहा कि महिलाएं आज के दिन बिेशेष उपवास करती है जिसमें वो पानी तक ग्रहण नहीं करती है।जिससे भगवान रघुनाथ के प्रति गहरी आस्था होती है और भगवान रघुनाथ महिलाओं की मंन्नत पूरी करते है। उन्होने कहाकि कल से दशहरा उत्सव के लिए चार माह रहते है। और कल से रघुनाथ भग्वान हर शाम को चार माह तक मंदिर के सामने झूले में भगवान झुला झूलते है।और भक्तों को दर्शन देते हैँ।
श्रद्वालु रूपेश्वरी ने कहाकि भगवान रघुनाथ के सम्मान में जल विहार उत्सव धूमधाम से मनाया।उन्हांने कहाकि
-स्थानीय श्रद्वालु शिवानी ने कहाकि रघुनाथ पुर में भगवान रघुनाथ जी का जल विहार उत्सव धूमधाम से मनाया गया।उन्होने कहाकि मणिकर्ण घाटी के देवता काली नाग भी आए है।



