पश्चिमी हिमालय समशीतोष्ण आर्बोरेटम में ‘अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस’ का आयोजन

न्यूज मिशन
कुल्लू
हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला, द्वारा 21 मार्च 2024 को पश्चिमी हिमालय समशीतोष्ण आर्बोरेटम, पॉटर हिल, समरहिल, शिमला में “अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस” का आयोजन किया गया । डॉ॰ संदीप शर्मा, निदेशक, हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला ने कहा कि इस वर्ष का थीम वन और नवाचार: एक बेहतर दुनिया के लिए नए समाधान है । उन्होनें सतत विकास के लिए वन प्रौद्योगिकी और वनों के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभों पर विस्तृत में व्याख्यान दिया । उन्होने जलवायु परिवर्तन पर चिंता जताई और विद्यार्थीयों एवं अन्य सभी प्रतिभागियों को पौधरोपण और वनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया और छात्रों से आग्रह किया कि वो वन के सरंक्षण में अपना योगदान दे और समाज में जागरूकता फैलाएँ । उन्होनें कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से लोगों के बीच वन एवं पर्यवरण के बारे में जागरूकता फैलाना है । मुख्य वक्ता राजा भसीन, इतिहासकार एवं विख्यात लेखक ने शिमला की वनस्पति पर औपनिवेशिक प्रभाव के विषय पर अपने विचार सांझा किए । उन्होने अंग्रेजों द्वारा वानिकी क्षेत्र में शिमला में किए गए कार्यों से भी अवगत करवाया । शिमला में चिनार के पाँच पौधे रोपित किए गए थे जो आज भी मौजूद है । वर्तमान में शिमला के जंगल दूषित हो रहे है, र्जंगलों में प्लास्टिक कचरा फेंका जा रहा है । कई क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा फेंकना आग को फैलाने मे सहयोग करता है, अतः इसकी रोकथाम जरूरी है । पौधरोपण में अधिक से अधिक स्वदेशी एवं स्थानीय प्रजातियों को लगाना आवश्यक है । शिमला के जंगलों मे पेरिविंकल नाम का पौधा फ़ेल गया है जो स्थानीय पौधों को उगने नहीं देता । सौंदर्यीकरण के नाम पर हमने कुछ एसी विदेशी प्रजातीय लगाई जबकि स्थानीय प्रजातियाँ भी वेहतर है । इसके अलावा उन्होनें कहा कि वनों की कटाई के कारण प्रति वर्ष 10 मिलियन हेक्टेयर भूमि नष्ट हो जाती है और लगभग 70 मिलियन हेक्टेयर भूमि आग से प्रभावित होती है । उन्होनें छात्रों को सलाह दी की वो पर्यवरन सरंक्षण में जरूरी कदम उठाने और बदलाव लाने की मशाल थामे क्योंकि भविष्य उज्ज्वल उन्ही की सोच और अच्छे कारी से होगा । डॉ. जगदीश सिंह, वैज्ञानिक ने पर्यावरण सरंक्षण के मिशन लाइफ मे वर्णित उद्देशयों को अपना कर सभी से अपना योगदान देने का आग्रह किया । ऊर्जा मे वचत कर एवं पौधरोपण से कार्बन फूट प्रिंट को कम किया जा सकता है । पौधरोपण कार्बोन फूट प्रिंट को कम करने का सबसे अच्छा साधन है अतः सभी का कर्तव्य है कि पौधों को रोपे और उनका सरंक्षण करे । इसी तरह प्लास्टिक का भी कम से कम उपयोग किया जाना चाहिए । डॉ॰ वनीत जिश्टु, वैज्ञानिक ने जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए हरित स्थान के महत्व के बारे में लोगों को अवगत करवाया । उन्होनें सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटि प्रोजेक्ट मे ग्रीन स्पेस विकसित करना जरूरी है क्योंकि विकास के कारण वन क्षेत्र कम हो गया है । उन्होनें कहा कि संस्थान नें पौटर हिल शिमला में आरबोरेटम विकसित किया है जिसमे महत्वपूर्ण 120 स्थानीय प्रजातियों के पौधे रोपित किए है, जिससे इनके सरंक्षण में फायदा होगा और शिमला शहर के पास ग्रीन स्पेस भी उपलब्ध होगा । डॉ॰ जोगिंदर चौहान ने कहा कि युवा पीढ़ी बदलाव का स्त्रोत है आता उन्हे पर्यावरण के सरंक्षण में अपना योगदान देना चाहिए । इसके अलावा उन्होनें कहा कि जंगलों में जंगली खाद्य पौधे रोपित किए जाने चाहिए ताकि जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक वास में भोजन उपलब्ध हो । कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से पर्यावरण विज्ञान के 45 विद्यार्थीयों एवं संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं शोधार्थियों सहित 75 लोग शामिल हुये



