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कुल्लू जिला की तीर्थन घाटी में  भूस्खलन की चपेट आए 2 गांव  उजड़ने का मंडराया खतरा

सैकड़ो लोगों  बेघर  होने से रिश्तेदारों के घरों में शरण लेने को मजबूर

20 से अधिक रिहायशी मकानों में पड़ी बड़ी बड़ी दरारें 
प्रभावितों ने सरकार से भूगर्भ वैज्ञानिकों से सर्वेक्षण की की मांग
सैकड़ों प्रभावित लोगो ने सरकार से सुरक्षित जगह राहत कैंपों में उचित प्रबंध की भी की मांग
न्यूज मिशन
कुल्लू
कुल्लू जिला बंजार उपमंडल में तीर्थन घाटी के बंदल और कोशुनाला गांव में भूस्खलन के कारण  2 गांव को उजाड़ने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में 20 से अधिक मकान में बड़ी-बड़ी दरारे पड़ने से मकानों में रहना असुरक्षित हो गया है। जिससे लोगों ने मकान खाली कर रिश्तेदारों के घर में शरण ली है। ऐसे में पूरे क्षेत्र के करीब 5 किलोमीटर के दायरे में पहाड़ी धंसने  से लोगों  के घरों जमीनों बगीचों  को भारी नुकसान हुआ है। प्रभावित लोगों ने सरकार और प्रशासन से सुरक्षित जगह पर रहने की व्यवस्था की मांग की है। प्रभावित परिवारों ने सरकार से भूगर्भ वैज्ञानिकों के सर्वेक्षण की मांग की है ताकि लोगों की जमीन धंसने से कारणों की जानकारी मिले और भविष्य के उनको सरकार सरकारी भूमि पर रिहायशी मकान बनाने के लिए जगह मुहैया करवाएं।
स्थानीय निवासी प्रितम शर्मा ने कहाकि लोक निर्माण विभाग के द्वारा सड़कों  के किनारे पानी की निकास नालियां नहीं बनाई जिससे बारिश का पानी लोगों के खेतों,बगीचों में गया । जिससे बंदल और कोशुनाला गांव की पूरी जमीन धंस रही है। जिससे दर्जनों मकानों को नुक्सान हुआ है।उन्होंने कहाकि सरकार प्रशासन प्रभावित परिवारों को रहने के लिए उचित व्यवस्था करें।
स्थानीय ग्रामीण महिला विद्या ने कहा कि भारी- बारिश से तीर्थन घाटी के कोशुनाला  और बंदल गांब  में भूस्खलन के कारण दर्जनों मकानों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन से लोगों के घरों बगीचों का भारी नुकसान हुआ है। जिससे बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने से लोगों के घर खेत बगीचे पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से लोगों के रहने के लिए उचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि भूस्खलन से प्रभावित परिवारों को सरकार की तरफ से उचित मुआवजा मिलना चाहिए लोगों ने बड़ी मेहनत से पूंजी इकट्ठा कर घर बनाया था और आज वह घर क्षतिग्रस्त हुआ है। जिससे लोगों को अपने रिश्तेदारों के पास सरल लेकर रहने को मजबूर है उन्होंने कहा कि ऐसे में सरकार को जल्द उनके रहने का इंतजाम करना चाहिए।
स्थानीय प्रभावित महिला आशा ने कहा कि कोशु नाला  गांव में जुलाई माह  15 दिन  लगातार हुई। भारी बारिश से पूरे भूस्खलन के कारण गांव में करीब 15 मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं और लोगों के मकान रहने के लिए असुरक्षित हो गए हैं। ऐसे में लोगों ने अपने रिश्तेदारों के पास शरण ली है। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से पीड़ित परिवारों को रहने के लिए राहत कैंप में उचित व्यवस्था करें उन्होंने कहा कि भूस्खलन के कारण गांव के दर्जनों लोगों के से आठ आठ कमरों वाले मकान पूरी तरह से तहस-नहस हो गए हैं और जमीनें भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुई है। ऐसे में सरकार सुरक्षित जगह पर लोगों के रहने की व्यवस्था करें।
स्थानीय प्रभावित  उदय शर्मा ने कहा कि भारी बारिश से गुशैणी के साथ लगते क्षेत्र बंदल और कोशुनाला गांव का पूरा का पूरा क्षेत्र भूस्खलन से धनुष रहा है। उन्होंने कहा की जगह-जगह पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हुई है जिसके चलते स्थानीय लोगों के दर्जनों मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें आने से गिरने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि लोग अपने घर छोड़कर अपने रिश्तेदारों के पास शरण ले रहे हैं उन्होंने कहा कि ऐसे में भूस्खलन से इस पूरे क्षेत्र के दूसरे गुशैणी को भी खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार से इस पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण भूगर्भ वैज्ञानिक से करवाने के लिए आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि अभी तक सरकार की तरफ से इसको लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन से इस पूरे क्षेत्र में 20 से अधिक मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें आने से नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि लोग अपने घर छोड़कर दूसरों के घरों में शरण लेने को मजबूर है ऐसे में प्रशासन की तरफ से अब तक प्रभावित परिवारों को उचित फौरी राहत भी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि उन लोगों के घरों जमीनों के साथ-साथ बगीचों को भारी नुकसान हुआ है जिसके चलते लोग बेघर हुए हैं और सरकार की तरफ से लोगों के पुनर्वास के लिए उचित कदम उठाया जाए।

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