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गड़सा घाटी की महिलाएं जंगली फल खनोर से सर्फ, डिश वाश, लिक्यूड डिटर्जन आटा कर रही तैयार

सरस मेले में स्टोल लगाकर लोगों को खनोर से तैयार उत्पाद की बिक्री कर आर्थिकी कर रही सुदृढ़

भविष्य में खनोर से शैम्पू, हैंड वाश तैयार करने क़ी लक्ष्य
जंगली फल खनोर महिलाओं की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में बड़ा साधन
न्यूज मिशन
कुल्लू
कुल्लू जिला में गड़सा घाटी की महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के लिए जंगली फल खनोर से विभिन्न तरह के उत्पाद तैयार कर महिला सशक्तिकरण का संदेश दे रही है। ऐतिहासिक रथ मैदान के सरस मेले में शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा स्टॉल लगाकर जंगली फल खाना से तैयार विभिन्न तरह के केमिकल फ्री उत्पाद तैयार कर लोगों को आकर्षित कर रही है ऐसे में जंगली फल खनोर से सर्फ, डिश वाश, लिक्यूड डिटर्जन आटा बिक्री कर आरती की सुदृढ़ कर रही है
वीओ- ग्राम पंचायत भलाण- 2 शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह की प्रधान सरला ठाकुर ने कहा कि  गैस घाटी में विभिन्न स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जंगली फल खनोर कोई इकट्ठा करके उसके विभिन्न तरह के उत्पाद तैयार कर रहे हैं उन्होंने कहा कि  जंगली फल खनोर  से सर्फ, डिश वाश, लिक्यूड डिटर्जन और सीरा तैयार करते है। उन्होंने कहा कि पंच पंचायत के 35 सहित सहायता समूह की महिलाएं बड़े स्तर पर आने वाले समय में जंगली खनोर  से और अधिक उत्पाद  तैयार करेंगे जिससे कि महिलाओं की आर्थिक की सुदृढ़ होगी उन्होंने कहा कि लोकल उत्पाद डालें मक्की का आटा शहर सहित अन्य कई तरह की उत्पाद को बेचकर आर्थिकीकर रहे हैं।
वीओ-द्वारा पंच पंचायत की महिलाएं विभिन्न तरह के उत्पाद तैयार कर अपनी आरती की मजबूत कर रही है उन्होंने कहा कि विकास खंड भुंतर की तरफ से भी महिलाओं को विभिन्न तरह के उत्पाद तैयार करने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है उन्होंने कहा कि घर्स घाटी के भलान पंचायत के साथ-साथ अन्य पंचायत में जंगली फल खनोर से विभिन्न तरह के उत्पाद तैयार कर रहे हैं उन्होंने कहा कि 10 किलो खनोर  से डेढ़ किलो ही सीक आटा निकलता है। उन्होंने कहा कि महिलाएं बड़े स्तर पर जंगलों से फल इकट्ठा कर स्वयं सहायता समूह के द्वारा एफपीओ के माध्यम से प्रोसेसिंग कर विभिन्न तरह के उत्पाद तैयार कर रहे हैं उन्होंने कहा कि खनोर को 10 दिनों तक पानी के बीच बार बार डुबाकर रखने के बाद छिलका निकाला जाता है जिसके बाद पानी से डिश वाश ,लिक्यूड डिटर्जन, सर्फ तैयार किया जाता है और खनोर क़ी गिरी से आटा सीक तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शैंपू हैंड वॉश का भी निर्माण किया जाएगा और इसके साथ-साथ महिलाएं अचार शहर डालें जूस का भी उत्पादन कर रहे हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की आर्थिक की सुदृढ़ हो रही है।। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान महिलाएं खनोर के आटा सीख को खाकर कई तरह की न्यूट्रिशन उपलब्ध होती है और उससे कई तरह की औषधि गुण चलते महामारी में लाभ मिलता है।
 स्थानीय निवासी गंगा  राम ठाकुर  ने कहा कि जंगली फल खनोर से पुराने समय में लोग कपड़े धोने के काम में उसे करते थे और खनोर की गिरी को 7 बार धोकर उसे सीक आटा तैयार करते थे उसी तर्ज पर शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आज के इस आधुनिक युग में  कन्नूर से कई प्रकार के उत्पाद तैयार कर रहे हैं उन्होंने कहा कि खनोर में औषधिय गुण पाए जाते है। उन्होंने कहा कि कुल्लू जिला के सभी जंगलों में जंगली फल कोर बड़े पैमाने पर पाए जाते हैं उन्होंने कहा कि ऐसे में जहां यह औषधि फल हर साल बड़े पैमाने पर सब कर नष्ट हो रहा है इसके लिए महिलाओं के द्वारा इकट्ठे कर कई तरह के उत्पाद तैयार किया जा रहे हैं जिससे महिलाओं की आर्थिक की भी सुदृढ़ हो रही है उन्होंने कहा कि सरकार को इसको बढ़ावा देने के लिए योजना बनाकर स्वरोजगार की दिशा में कार्य करना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की आर्थिक की सुदृढ़ हो सके।

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