लंका दहन की रथयात्रा में सैकड़ो देवी देवताओं व हजारों श्रद्वालुओं ने में लिया भाग
माता हिंडिंबा व राजपरिवार के सदस्यों ने निभाई लंका दहन की परंपरा

सैंकड़ो देवी देवताओं ने रघुनाथ भगवान से ली विदाई
देवी देवताओ के देवालय लौटने के साथ ढालपुर से रौनक हुई खत्म
न्यूज मिशन
कुल्लू
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के ऐतिहासिक ढालुपर मैदान में 7 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में लंका दहन कर प्राचीन परंपरा के साथ संपन हुआ। इस दौरान भगवान रघुनाथ की रथयात्रा में सैंकड़ो देवी देवताओं के साथ हजारां की संख्या में श्रद्वालुओं ने भाग लिया। ऐतिहासिक ढालुपर के अस्थाई शिविर से भगवान रघुनाथ लाव लश्कर के साथ रथ में सवार हुए विधिवत पूजा अर्चना के साथ लंका दहन के लिए माता हिंडिंबा की अगुवाई में बड़ी संख्या में श्रद्वालुओं ने भाग लिया और लंका दहन के लिए रथयात्रा पशु मैदान के अंतिम छोर पर पहुंची जिसके बाद माता हिंडिंबा व राज परिवार के सदस्यों ने व्यास तट पर लंका दहन की परंपरा का निर्वहन किया। लंका बेकर से रथयात्रा ढालपुर रथ मैदान में पहुंची जहां से देवी देवताओं ने भगवान रघुनाथ से विदाई ली इसके साथ पशु मैदान रथयात्रा वापिस रथ मैदान पहुंची । रथमैदान से भगवान रघुनाथ पालकी में सवार होकर रघुनाथपुर अपने मंदिर लौटे देवी देवताओं ने भी अपने अपने गांव की और कूच किया।
भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहाकि 7 दिवसीय दशहरा में सभी परंपराओं निर्वहन किया गया है और लंका दहन से पहने खड़की जाच होती है जिसके बाद देवमहाकुंभ में लंका दहन के लिए रथयात्रा के साथ लंका दहन की परंपराओं का निर्वहन किया गया। जिसके बाद रथमैदान से भगवान रघुनाथ सोने की पालकी में सवार होकर भगवान रघुनाथ और देवता श्रृंगा ऋषि के साथ भव्य मिलन के बाद विदाई हुई इस विदाई में मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह और कारदार दानवेंद्र सिह ने नम आंखों से भावुक हुए जिसके बाद भगवान रघुनाथ मंदिर सुल्तानपुर के लिए भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा वापिस लौट गई इस दौरान दर्जनों देवी देवता भी शोभायात्रा में शामिल हुए। देवी देवताओं के देवालय लौटने पर ढालपुर से रौनक गायब हुई लेकिन दशहरा मैदान दर्जनों देवी देवता अस्थाई शिविर में जाे कल अपने देवालय लौटेंगे।



