दशहरा उत्सव में मोहल्ले पर देवी देवताओं का हुआ भव्य देवमिलन
छठे दिन शान से निकली नरसिंह भगवान की शाही जलेब

सैंकड़ो देवी देवताओं ने भगवान रघुनाथ शिविर मे लगाई हाजरी
लंका दहन के लिए देवी देवताओं को दिया केसर की पुड़िया भेंट कर न्यौता
नरसिंह भगवान की गद्दी में देवी देवता हुए नतमस्तक
छठे दिन शान से निकली नरसिंह भगवान की शाही जलेब
देवता जम्दगनि ऋषि व लक्ष्मी नारायण के साथ आधा दर्जन देवी देवताओं के हारियान जलेब में झूमें
न्यूज मिशन
कुल्लू
अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के छठे दिन ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ के शिविर में सैँकड़ो देवी देवताओं ने हाजरी लगाई और भगवान रघुनाथ के रथ के चारों तरफ देवी देंवताओं का भव्य मिलन हुआ। भगवान रघुनाथ की तरफ से लंका दहन के लिए सभी देवी देवताओं को केसर की पुड़िया भेंट कर लंका दहन के लिए न्यौता दिया । इस दौरान देवी देवताओं भगवान नरसिंह की गद्दी के पास नतमस्तक हुए और छड़ीबरदार महेश्वर सिंह को पुष्प भेंट किए। इस बाद्ययंत्रों की देवधूनों पर भव्य देवमिलन से माहौल देवमय हो गया।छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि दशहरा उत्सव के छठे दिन मोहल्ले का कार्यक्रम हुआ सभी देवी देवताओं ने भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर व रथ के पास हाजरी लगाई और इस बार दशहरा उत्सव में सैंकडो देवी देवताओं ने हाजरी भरी है। उन्होंने कहाकि भगवान रघुनाथ की तरफ से देवी देवताओं केसर की पुड़िया भेंट कर लंका दहन का न्यौता दिया गया और कल लंका दहन के लिए चढ़ाई होगी और लंका दहन कार्यक्रम के बाद भगवान रघुनाथ अपने मंदिर सुल्तानपुर दरवार में जाएगें।उन्होंने कहाकि आज रात को रघुनाथ के अस्थाई शिविर में देवी दुर्गा पूजन होगा माता त्रिपुरा सुंदरी माता के पुजारी देवी की दुर्गा रूप में शेर की सवारी कर पूजन होगा और प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया जाएगा।उन्होंने कहाकि दशहरा उत्सव के छठे दिन जलेब में रौनक दिखी।भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहाकि दशहरा उत्सव के छठे दिन महल्ला मनाया जाता है जब दशहरा उत्सव में आए सभी देवी देवता भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर और भगवान रघुनाथ के रथ के पास हाजिरी भरी।उन्होंने कहाकि भगवान रघुनाथ के पास सभी देवी देवताओं की रजिस्ट्रर में हाजरी लगी और भगवान रघुनाथ की तरफ से देवी देवताओं को केसर की पुडिया और फूल देकर लंका दहन के लिए निमंत्रण दिया गया।उन्होंने कहाकि कल रावण के बध के लिए शाम 5 बजे रथ यात्रा होगी और उसमें लंका दहन के लिए देवी देवता के साथ रण के लिए जाएगें और लंका बेकर में लंका दहन की परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा।उन्होंने कहाकि भगवान नरसिंह की जलेब में छठे दिन किसी देवी देवता को निमंत्रण नहीं जाता और देवी देवता खुद जलेब में भाग लेते है जिनमें 7,8 देवी देवता नरसिंह भाग की जलेब में भा लेते है।



