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हिमाचली पहाड़ी कलाकारों को बड़े फेस्टिवल में नहीं मिल रहा अच्छा मेहनताना- डॉक्टर ओम राणा

कहा-15 वर्षों से जनजातीय और हिमाचली संस्कृति के संरक्षण के लिए कर रहे कार्य

मेले और त्योहारों में मंच न मिलने से मायूस
उपनिदेशक बागवानी विभाग डॉक्टर नीना ठाकुर ने किया मेरी बंदी चोकोबार वीडियो एल्बम का विमोचन
न्यूूज मिशन
कुल्लू
हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति पूरे देश दुनिया में सुप्रसिद्ध है ऐसे में पिछले डिड दशकों से जनजातीय और हिमाचली संस्कृति के संरक्षण के लिए पहाड़ी गायक कलाकार ओम ठाकुर अपने मधुर आवाज से कई वीडियो एल्बम के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करते आए हैं ऐसे में उनकी नई वीडियो एल्बम मेरी बंदी चोकोबार का विमोचन उपनिदेशक बागवानी विभाग डॉक्टर नीना ठाकुर ने किया इस मौके पर उन्होंने डॉक्टर ओम ठाकुर के द्वारा संस्कृति के संरक्षण संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की और हिमाचल के लोगों से हिमाचल के कलाकारों को और अपनी समृद्ध संस्कृति और बोली को आगे बढ़ाने के लिए भी अपील की।
प्रसिद्ध पहाड़ी गायक कलाकार एवं  वैज्ञानिक डॉ ओम राणा ने कहा कि पिछले डेट दशकों से पांगी लाहौल स्पीति और हिमाचल की संस्कृति के संरक्षण संवर्धन के लिए कार्य कर रहे हैं उन्होंने कहा कि एक नया वीडियो गाना आज लॉन्च किया है मेरी बंदी चोकोबार उन्होंने कहा कि लोगों के मनोरंजन के लिए यह गाना बनाया है। रेखा की लव सॉन्ग है और पिछले कई सालों की मेहनत के बाद यह गाना रिलीज हो रहा है दशकों से अपील है कि इस गाने को ओम राणा युटुब पेज पर लॉन्च हुआ है और इसको ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें उन्होंने कहा कि  उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति पांगी और लाहौल स्पीति की संस्कृति को लेकर डेट दर्शन गाने वीडियो एल्बम के माध्यम से लोगों के सामने लाए हैं और इसके अलावा हिंदी गाने भी गए हैं और हिमाचल के संस्कृति के लिए भी दर्जनों गाने वीडियो एल्बम के माध्यम से लोगों के सामने लाए हैं उन्होंने कहा कि समृद्ध संस्कृति के लिए लगातार पिछले 15 वर्षों से प्रयास कर रहे हैं उनका की हिमाचल के पहाड़ी कलाकारों को प्रदेश के बड़े मेलों में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में अच्छा मेहनताना नहीं मिल पा रहा है उन्होंने कहा कि जहां पड़ोसी राज्य पंजाब के कलाकारों को हिमाचल के मेले और त्योहारों में स्टार नाइट के लिए 40 50 लख रुपए दिया जाता है वहीं हिमाचल के कलाकारों को एक डेढ़ लाख रुपए से ही संतोष करना पड़ता है और ऐसे में हिमाचल के समृद्ध संस्कृति के संरक्षण के लिए दर्जनों ऐसे कलाकार है जिनको हिमाचल में मिले और त्योहारों में मैच प्रदान नहीं किया जाता और ऐसे में कहीं ना कहीं प्रदेश की जो समृद्ध संस्कृति को संरक्षण करने वाले लोग हैं उनको सरकार और प्रशासन की तरफ से प्रोत्साहन नहीं दिया जा रहा है उन्होंने कहा कि ऐसे में सरकार और प्रशासन को हिमाचल के समृद्ध संस्कृति के संरक्षण संवर्धन के लिए पहाड़ी कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि हिमाचल की समृद्ध संस्कृति का संरक्षण संवर्धन प्रचार प्रसार हो सके उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 50 से अधिक जिला राज्य स्तरीय और अंतरराष्ट्रीय स्तरीय मेलों का आयोजन किया जाता है लेकिन पंजाबी और बॉलीवुड प्लेबैक सिंगारे को इन मेलों में करोड़ों रुपए दिए जाते हैं लेकिन हिमाचल के पहाड़ी कलाकारों को लाखों रुपए ही दिए जाते हैं जिससे हिमाचल के कलाकारों की कला का महानताना नहीं मिल पा रहा है उन्हें कहा है कि यही कारण है कि आज हिमाचल की संस्कृति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार प्रसार और प्रदर्शित नहीं हो पा रही है उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र की संस्कृति के संरक्षण संवर्धन के लिए पिछले 15 वर्षों से कार्य कर रहे हैं लेकिन कहीं ना कहीं जनजातीय उत्सव में ही जनजातीय संस्कृति के संरक्षण संवर्धन करने वाले कलाकारों को मंच  प्रधान न करना यह कलाकारों  तापमान है उन्होंने कहा कि भविष्य में पहाड़ी कलाकारों को बाहरी राज्यों के कलाकारों की तरह अच्छा मेहनताना ना मिल मिलेगा तो आने वाले भविष्य में पहाड़ी संस्कृति लुप्त होगी और इसके लिए सरकार प्रशासन जिम्मेदार होगा।।

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