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कुल्लू जिला में सेब,नाशपती, प्लम, जपानी के बाद चेरी के उत्पादन से बागवान कर रहे आर्थिकी सुदृड़

देशभर में चेरी के फल की भारी डिमांड 3 माह में तैयार होती है चेरी की फंसल 

लगघाटी में खेम राज और कमलेश ने 8 हजार की फीट की उचाई पर चेरी का बगीचा किया तैयार
न्यूज मिशन
कुल्लू
कुल्लू जिला में सेब,नाशपती ,प्लम,जपानी के बाद बागवान चेरी की फंसल का उत्पादन कर आर्थिकी सुदृड कर रहे है।कुल्लू जिलाभर के कई क्षेत्रों में चेरी की फंसल में  बागवान रूचि दिखा रहे है।पूरे देशभर में चेरी के फल की भारी डिमांड है ।चेरी को स्वास्थ के नज़रिये से अच्छा फल माना जाता है। इसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते है, जैसे विटामिन ए, विटामिन 6, थायसिन, नायसिन, मैगनीज, आयरन, कॉपर और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में उपस्थित होता है, तथा चेरी में एंटीऑक्सीडेंट भी अधिक मात्रा में पाया जाता है। विश्व के यूरोप और एशिया, तुर्की और अमेरिका जैसे देशो में चेरी का उत्पादन सबसे अधिक किया जाता है।वहीं जिला कुल्लू के लगघाटी में बागवान ने उचाई बाले क्षेत्र में चेरी का उत्पादन कर 
खेमराज ठाकुर ने बताया कि 2012 में चेरी के वृक्ष लगाए गए थे और नर्सरी बड़ाग्रां पतलीकुल से पेड़ लिए थे। उन्होंने कहा कि इसके बहुत अच्छे रिजल्ट आ रहे है। उन्होंने कहा कि उसे समय 200 पेड़ खरीद कर लाए थे। उन्होंने कहा कि आजकल मेरे पास ढाई सौ के करीब चेरी के वृक्ष कामयाव है। उन्होंने कहा कि मात्र तीन माह की चेरी की फसल होती है जब से फ्लोरिंग और तुड़ान तक। उन्होंने कहा कि ऐसे में युवाओं को भी रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि और इसके दाम भी बहुत अच्छे मिल रहे हैं और फसल भी हर साल अच्छी होती हैं। उन्होंने कहा कि पहले किसान सेव पर ही निर्भर थे फिर जापानी लगाना लोगों ने शुरू किया। अब जापानी के बाद चेरी के वृक्ष ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसान बागवान लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज के दिन में 20 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा ज्यादा से ज्यादा इसमें अपनी भूमिका निभाई और नशे से दूर रहे, युवा बागवानी की ओर अपना रुझान बढांए। उन्होंने कहा कि डेढ़ सौ से लेकर 200 रूपये किलो के हिसाव से उन्हें फसल के दाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़क सुविधा न होने के कारण भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पेड़ों में अगर गोबर खाद्य डालने है तो वहां पर पहुंचना मुश्किल हो रहा है। सरकार से ग्रह है कि सड़क या फिर घोड़ा रोड बनाया जाए र्ताक हम गोबर खेतों व बगीचों तक पहुंचा जा सके। उन्होंने प्रदेश सरकार में सीपीएस सुंदर सिंह ठाकुर से भी आग्रह किया है कि जल्द से जल्द सड़क मार्ग या घोड़ा मार्ग बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यहे 8000 की फिट की हाइट पर एक बगीचा तैयार किया गया है। और ऐसे में 8000 की फीट हाइट पर वातावरण बहुत अच्छा है।
किसान कमलेश ठाकुर ने बताया कि घाटी के युवाओं को सेब जापानी के बाद चेरी के वृक्ष लगाए जाएं जो की जापानी के बाद तीसरा विकल्प है सेरी के वृक्ष लगभग 8000 फीट की ऊंचाई पर लगा सकते हैं। गर्म इलाके में चेरी कामयाव नहीं हो सकती हैं। यह ठंडा क्षेत्र में ही चेरी के वृक्ष कामयाब हैं। उन्होंने कहा कि 5 वर्ष के बाद चेरी का बगीचा तैयार हो जाता है। उन्होंने कहा कि पर वृक्ष 50 केजी से 100 केजी तक इसकी फसल होती हैं। आने वाले समय में युवाओं के लिए भी रोजगार घर द्वार बैठे ही मिल सकता है। उन्होंने कहा कि इसके दाम भी 200 किलो के हिसाब से बिक रहा हैं। उन्होंने कहा कि 20 युवाओं को यहां पर रोजगार मिल रहा हैं। उन्होंने कहा कि सरकार से हमें उम्मीद है कि नेट की सब्सिडी और खाद आदि की सब्सिडी दी जाए। उन्होंने कहा कि जिला कुल्लू की नर्सरी में पेड़ नहीं मिल रहे हैं, यह ज्यादातर शिमला से ही लाने पड़ते हैं। सरकार से आग्रह रहेगा कि यहां पर भी चेरी की नर्सरी लगाई जाए ताकि घाटी के युवा जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चेरी के वृक्ष लगा सके और वहां पर सभी को रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि इसमें ज्यादा मेहनत भी नहीं है और उतना खर्च भी नहीं है और ऑर्गेनिक के तरीके से ही तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार इन स्थानों तक सड़क सुविधा प्रदान करें ताकि किसानों को उचित सुविधा मिल सकें। उन्होंने कहा कि 2 से 3 घंटे का सफर तय कर सड़क मार्ग तक पहुंचाना पड़ता हैं।स्थानीय बागवान महेंद्र सिंह ने बताया कि सेव और जापानी के बाद तीसरा विकल्प चेरी है यह फसल तीन माह में तैयार होती है। उन्होंने कहा कि इसमें बहुत ही ज्यादा रोजगार है। उन्होंने कहा कि अब यह लगघाटी में कुछ किसानों के द्वारा चेरी के बगीचों को तैयार किया गया है। और युवाओं को रोजगार दे रहें है। उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा ऊंचाई वाले क्षेत्र के किसान चेरी के वृक्ष लगाए ताकि लोगों की आर्थिक की मजबूत हो और स्थानीय युवाओं को भी इसमें रोजगार उपलब्ध होता है। उन्होंने कहा कि चेरी का वृक्ष लगाने के बाद तीन-5 साल में फल देना शुरू कर देता है और 8 साल में यह बहुत ही अच्छी फसल दे देता हैं।

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