देवता श्रेत्रपाल इंसान की भांति ‘अपनों’ के सुख-दुख को बांटने के लिए तारापुर कोठी के दौरे पर होंगे रवाना
4 दिनों के परिक्रमा पर वाद्ययंत्रों संग नापेंगे दर्जनों गांव
10 दिसबंर से तारापुर कोठी के दौरे पर रवाना होंगे देवता क्षेत्रपाल
मूल स्थान रोपड़ी में और भुट्ठी गांव के आराध्य देवता है क्षेत्रपाल
न्यूज मिशन
कुल्लू के देवताओं के दादा कहे जाने वाले कतरूसी नारायण की लगघाटी और लगघाटी के तहत आने वाले भुट्ठी गांव के आराध्य देवता क्षेत्रपाल 3 सालों के बाद अपने क्षेत्र की परिक्रमा पर निकल रहे हैं। इस दौरान वे दर्जनों गांवों की परिक्रमा करेंगे। अपने हारियानों के सुख-दुख को सांझा करने के लिए देवता की यह परिक्रमा काफी अहम मानी जा रही है। कोठी के फेरे पर देवता अपने दर्जनों हारियानों और वाद्य-यंत्रों के साथ ऐतिहासिक यात्रा पर निकल रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो पूर्व में देवता चार कोठी के भ्रमण पर 5 वर्षों के बाद निकलते हैं। देवता स्वयं ही परिक्रमा के लिए दिन का निर्धारण करते हैं। देवता क्षेत्रपाल जिन कोठी की परिक्रमा करेंगे, उसमें तारापुर कोठी शामिल हैं। देवता को महसूस होता है क्षेत्र की परिक्रमा के लिए कौन सा समय शुभ रहेगा। देवता के इस दौरे को लेकर अन्य गांव वालों में भी खुशी की लहर है। लोगांें का कहना है कि उनके सुख-दुख में देवता शामिल हो रहे हैं। देवता के इस भ्रमण का सुखद पहलु यह है कि अपने गांव में देवता के आने पर वे उनके समक्ष अपनी समस्याओं को भी रखेंगे।
इन गांवों का करेंगे भ्रमण
लगघाटी की तारापुर कोठी के अंतर्गत देवता क्षेत्रपाल जिन गांवों का भ्रमण करने जा रहे हैं। 9 दिसबंर को देवता रथ में विराजमान होगें, 10 दिसबंर को देवता रोपड़ी, सतरीम, भूमतीर में रात्री ठहराव होगा, तो 11 दिसबंर को देवता बढेईग्रां, छोरगपीन, और रात्री ठहराव जठानी में होगा। 12 दिसबंर को देवता खारका, भल्याणी में रात्री ठहराव होगा। 13 दिसबंर को देवता मड़घन, शांघन, घल्याणा और रात्री ठहराव बड़ाग्रां में होगा, 14 दिसबंर को देवता पलांलग, भजलीग इसके देवता सीधे ही अपने मूल स्थान भुट्ठी लौटेंगे। देवता को भ्रमण से लौटने पर भी देवता का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया जाएगा।
देवता क्षेत्रपाल के कारदार सुंदर सिंह का कहना है कि देवता के हर गांव में स्थान हैं। अपने हारियानों का सुख-दुख साझा करने के लिए देवता परिक्रमा पर निकलते हैं। 4 दिन की परिक्रमा में देवता कई गांवों का भ्रमण करेंगे। इस दौरान कई गांवों में देवता के लिए भंडारा भी आयोजित हो रहा है। देवता के कारदार का कहना है कि घाटी के लोगों को किसी प्रकार की आपदा का सामना न करना पड़े, इस लिहाज से इस परिक्रमा को ऐतिहासिक माना जा रहा है।



