अश्वमेध यज्ञ में भगवान श्रीराम ने बनाई अंगुष्ठ मात्र भगवान रघुनाथ माता सीता दिव्य मूर्तियां -महेश्वर सिंह
कहा-भगवान रघुनाथ को दूध दही शहद घी शक्कर, पंच अमृत तुलसी से होता हैविधिवत स्नान

भगवान रघुनाथ के उठने से सोने तक मंत्रोच्चारण के साथ 7 बार निभाई जाती है आरतियों की परंपरा
भगवान रघुनाथ के आगमन के बाद कुल्लू घाटी में वैष्णव धर्म की हुई स्थापना
वैष्णो धाम से पहले कुल्लू घाटी में शिव और शक्ति की होती थी पूजा अर्चना वैष्णव धर्म मे षोडशोउपचार पद्धति से होती है पूजा अर्चना
करीब 363 वर्ष पुराना है अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा देव महाकुंभ का इतिहास
न्यूज मिशन
कुल्लू
अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में अद्भुत देव संस्कृति के विभिन्न रंग दिख रहे हैं ऐसे में ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ के अध्यक्षता में सैकड़ो देवी देवता विराजमान है। भगवा रघुनाथ के अस्थाई शिविर में देवी देवता हाजिरी लगाकर आशीर्वाद ले रहे हैं वही सैकड़ो देवी देवताओं के मंदिरों में ढोल नगाड़ों की देवधूनों पर विधिवत पूजा अर्चना से माहौल भक्तिमय में है। भगवान रघुनाथ और माता सीता की दिव्या मूर्तियां अश्वमेध यज्ञ के समय की है जब भगवान श्री राम को गुरु वशिष्ठ ने अश्वमेध यज्ञ के लिए अर्धांगिनी के साथ परंपरा निर्वाह करने की बात कही तो उसे वक्त भगवान श्री राम ने अंगुष्ठ मात्र दिव्या मूर्तियां बनाई थी। जिसको राजा जगत सिंह के समय में 1650 ईस्वी में कुल्लू लाया गया था उसे वक्त से ही कुल्लू दशहरा उत्सव का इतिहास बना है और लगभग 363 वर्ष पूर्व अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की शुरुआत हुई थी जिसमें अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ के सम्मान में घाटी के समस्त देवी देवता इस देव महाकुंभ में शिरकत कर भगवान रघुनाथ सीहोर देवी देवताओं की आपसी मिलन अद्भुत देव संस्कृति पूरे देश दुनिया में विख्यात है।
भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ी पदार्थ महेश्वर सिंह ने कहा कि 1650 ईस्वी में अयोध्या से भगवान राम दिव्या मूर्तियां यहां राजा जगत सिंह के समय में लाई थी उन्होंने कहा कि राजा जगत सिंह ने उसे पुरोहित शालिग्राम जी के पूर्वज उन्होंने सारी की सारी पद्धति नोट कर दी और आज तक इस पर स्थित है पूजा होती है उन्होंने कहा कि करीब पौने दो घंटे तक बड़ी पूजा होती है उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ के प्रातः उठते है शौच इत्यादि जाते हैं उसका भी मंत्र है शौच जाने के बाद मिट्टी लगते हैं उसका भी मंत्र है और भोजन करते हैं तो उसका भी मंत्र है सोने जाते हैं तो उसका भी मंत्र है उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ जी को दूध दही शहद घी शक्कर, पंच अमृत तुलसी से स्नान किया जाता है उन्होंने कहा कि बड़े खेद का विषय है कि अब अयोध्या में यह पूजा पद्धति नहीं है उन्होंने कहा कि वैसे तो अयोध्या में बड़े-बड़े विद्वान है। उन्होंने कहा कि भगवान राम की दिव्य मूर्ति गुरु के निर्देश पर बनाई है उन्होंने कहा कि जब भगवान राम ने गुरु वशिष्ठ व अन्य गुरुओं से अश्वमेध यज्ञ की बात कही तो गुरु वशिष्ठ ने कहा कि राजन बिना अर्धांगिनी के अश्वमेध यज्ञ नहीं होगा या तो सीता जी को लाओ उन्होंने कहा कि मैंने माता कैकई से वचन दिया है। उसके बाद जब उन्होंने गुरुओं से विधान की बात कही तो उन्होंने कहा की आत्मा अंगष्ठ मात्र है और इतनी प्रतिमा बनेगी और आत्मा पर्दे में रहेगी दिखती नहीं है उन्होंने कहा कि जैसे लो जैसे ब्रह्म कुमारी में ज्योति स्वरूप होती है।उन्होंने कहा कि की सीता माता के दर्शन एक समय होती है जब पुजारी अपनी हथेली पर रखकर माता सीता के दर्शन करवाता है उसके बाद माता सीता को पर्दे में हारसिंगार कर बंद करते हैं उन्होंने कहा कि प्रात पूजा में माता सीता का स्नान खुले में नहीं किया जाता और माता-पिता को बस्तर लपेटकर स्नान किया जाता है और बड़ी पूजा में सिर्फ माता-पिता का श्रृंगार होता है उन्होंने कहा कि कुल्लू घाटी में वेस्टर्न धर्म से पहले यहां पर शिव और शक्ति की पूजा होती थी इसमें बलि प्रथा का नियम था उन्होंने कहा कि यहां पर हरि महात्मा जी से एक निवेदन किया गया था कि हम वैष्णो धाम की स्थापना तो करेंगे लेकिन जो यहां पर शिव और शक्ति की पूजा अर्चना होती है उसमें कोई व्यवधान न हो ।उन्होंने कहा कि यहां पर बलि प्रथा का नियम भी प्रचलित है उन्होंने इसीलिए विनय किया गया था उन्होंने कहा कि नरसिंह भगवान मासहारी है और भगवान रघुनाथ का ही रूप है लेकिन वह मांस ग्रहण करता है। नरसिंह भगवान को मांस का भोग लगता है और इसलिए ही हमको जब गद्दी दी गई थी तो उसमें पिछली परंपरा भी निभानी पड़ती है। और मांस को भोग लगाए बिना खाना नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ की दिन भर में साथ रतियां होती है और सुबह से लेकर रात्रि तक अलग-अलग समय में आर्तियां होती है भगवान के जागने से लेकर सोने तक पुजारी आरती करते हैं इसलिए भगवान रघुनाथ के पास दर्जनों पुजारी है जो अपनी बारी लगाकर पूजा अर्चना करते हैं।
जिला कांगड़ा से आई श्रद्धालु सीता ने कहा कि कुल्लू जिला को देवभूमि कहा जाता है और यहां पर आकर सचमुच में लगता है कि यह देवभूमि है उन्होंने कहा कि यहां पर दशहरा उत्सव देखने के लिए आए हैं और यहां पर भगवान रघुनाथ के दर्शन और देवी देवताओं के दर्शन कर दिव्य अनुभूति हो रही है उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ के मंदिर में पूजा अर्चना हरसिंगार विधिवत या आरती भोग प्रसाद लगाया गया है और यहां पर श्रद्धालुओं के लिए लंगर भी चल रहा है और वह भी ग्रहण किया है उन्होंने कहा कि देवभूमि कुल्लू में आकर दशहरा मैदान में अद्भुत अनुभूति होती है उन्होंने कहा कि जो भी लोग इस दशहरा उत्सव में आते हैं उनको भगवान अपने पास बुलाते हैं और इसलिए धौलपुर मैदान और दशहरा पर्व में दूधराज की कंदराओं से देवता यहां पर एक स्थान पर सैकड़ो देवता एकत्र होते हैं उन्होंने कहा कि हम पहाड़ों में चढ़कर अलग-अलग देवी देवताओं के दर्शन नहीं कर सकते लेकिन यहां पर दशहरा उत्सव में सैकड़ो देवी देवताओं के दर्शन करने से सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
हमीरपुर से आए श्रद्धालु रविदास शर्मा ने कहा कि दशहरा उत्सव में पहली बार भगवान रघुनाथ के दर्शन करने के लिए आए हैं उन्होंने कहा कि मैं कई दिनों से सोच रहा था कि कभी भगवान रघुनाथ के दर्शन करूंगा उन्होंने कहा कि भगवान का बुलावा आया और मैं यहां पर परिवार संग पहुंचा हूं और मैं यहां पर दर्शन किए हैं और यहां पर इस विषय उत्सव में प्रशासन के अच्छा प्रबंध किया गया है उन्होंने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि एक ही स्थान पर सैकड़ो देवी देवताओं के दर्शन करने का मौका मिला है और हम अपने आप को सौभाग्यशाली समझते हैं
स्थानीय श्रद्धालु पूनम ने कहा कि हम भगवान रघुनाथ के दर्शन करने के लिए आए हैं और भगवान रघुनाथ के दर्शन कर यहां पर आशीर्वाद लिया है उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ के स्थाई शिविर में बड़ी संख्या में लोग यहां पर पहुंच रहे हैं और भजन कीर्तनकार यहां पर धार्मिक माहौल है मनमोहन है दशहरा उत्सव में बहुत देवी देवता आए हैं जिनके दर्शन करके हमें अच्छा लग रहा है।



