कुल्लूबड़ी खबरहिमाचल प्रदेश

पर्यावरण विद सोनम बांगचुक और लदाख के लोगों की गिरफ्तारी आर्टिकल 19 का उल्लंघन- महिमन शर्मा

कहा- लद्दाख के लोग हिमालय को बचाने और छठे शेड्यूल को लेकर शांतिपूर्वक कर रहे आंदोलन

केंद्र सरकार हिमालय को बचाने के लिए लद्दाख के लोगों की मांगों को पूरा करें
लद्दाख के लिए पूर्ण राज्यत्व की मांग जायज

न्यूज मिशन

हिमालयन क्लाइमेट वॉरियर्सज, तथा सेव लाहौल स्पीति संगठन हिमाचल प्रदेश महिमन शर्मा कुल्लू में प्रेस वार्ता संबोधित करते हुए
प्रख्यात पर्यावरणविद, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम बांगचुक सहित लदाख में लगभग 150 से ज्यादा लद्दाख के निवासियों के साथ साथ पर्यावरण सुरक्षा, लद्दाख को 6th शेड्यूल की मानी गई मांग को लागू करवाने हेतु शांतिपूर्ण आप यात्रा करते हुए 2 मार्च को दिल्ली राजघाट पर पहुंचने वाले थे,उनको उनके साथियों सहित सिंधु बॉर्डर पर दिल्ली ब हरियाणा पुलिस द्वारा डिटेन करने के असंवैधानिक कार्य के चलते सोनम वांगचुक और लदाख के लोगों की गिरफ्तारी अवैध और असंवैधानिक है, जो उनके अधिकारों के Article 19 के स्पष्ट उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। वे न केवल लद्दाख अपितु संपूर्ण हिमालय की जलवायु की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं , जो प्रकारांतर से पूरे देश के इको सिस्टम को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग छठी अनुसूची के कार्यान्वयन की मांग कर रहे हैं, जिससे उनकी भूमि, वन, खनिज, संसाधनों, रीति-रिवाज और संस्कृति से संबंधित निर्णय लेने के लिए क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों और स्वदेशी समुदायों की मंजूरी आवश्यक होगी । क्योंकि अपने हज़ारों सालों से अर्जित लोकाचार और इंडिजिनस विवेक के माध्यम से केवल स्थानीय लोग ही यहाँ की कुदरती संसाधनों का प्रबंधन बखूबी कर सकते हैं न कि बाहरी लोग।
इस आंदोलन का नेतृत्व लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और करगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) कर रहे हैं, जो लद्दाख के लिए पूर्ण राज्यत्व की मांग कर रहे हैं और इसके अलावा लद्दाख के लिए अलग पब्लिक सर्विस कमीशन की स्थापना की मांग लद्दाख के लिए दो संसदीय सीटें छठी अनुसूची में लद्दाख को शामिल करना लद्दाख के लोग अपने भविष्य को आकार देने और अपनी भूमि की रक्षा के लिए छठी अनुसूची के कार्यान्वयन की मांग कर रहे हैं। यह क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों और स्वदेशी समुदायों की मंजूरी के बिना भूमि, वन, खनिज, संसाधन, रीति-रिवाज और संस्कृति से संबंधित निर्णय लेने हक स्थानीय जनता के हाथ में सुरक्षित करना चाहती है जो कि किसी भी तरह गैर कानूनी नहीं
हिमालयन क्लाईमेट वारियर्स* था सेव लाहौल स्पीति संगठन इस बात को बहुत ज़ोर देकर कहना चाहती है कि केन्द्र सरकार का किसी भी शांति पूर्ण जन आंदोलन की आवाज को न सुनने और उसे सत्ता बल से दबा देने का रवैया तानाशाही और अलोकतांत्रिक शासन का द्योतक है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Trending Now