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ह्रदय से विचार के धरातल पर जूझते हैं तो साहित्य की रचना होती है -डॉक्टर सरस्वती भल्ला

कहा- मानवीय मूल्य पर आधारित साहित्य के लिए संवाद जरूरी है

कुल्लू जिला परिषद भवन के सभागार में तीन दिवसीय बहुविषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रोफेसर डॉक्टर सरस्वती भल्ला ने किया शुभारंभ
देश-विदेश के 4 दर्जन साहित्यकार संगोष्ठी में ले रहे भाग

न्यूज मिशन

कुल्लू

जिला मुख्यालय कुल्लू स्थित जिला परिषद भवन के सभागार में बहुविषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज हो गया है। यह बहुविषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का कार्यक्रम 3 दिनों तक जिसमें देश- विदेश के साहित्यकार अपने शोध पत्र पढ़ेंगे।बहुविषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी साहित्य के विविध आयाम:एक विमर्श का उद्घाटन मुख्यातिथि अध्यक्ष एवं पूर्व प्रोफेसर हिमाचल विश्वविद्यालय डॉक्टर सरस्वती भल्ला ने किया। रूपी सिराज कला मंच साधना स्थली कुल्लू ने भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा वित्तपोषित बहुविषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है। साहित्य के विविध आयाम पर विमर्श किया जा रहा है। जिसमें साहित्यकारों, कॉलेज के शिक्षकों ने भाग लिया।

सेवानिवृत्ति प्रोफेसर डॉक्टर सरस्वती भल्ला ने कहा कि लोक साहित्य में हमारे मेल त्यौहार उत्सव बनाए जाते हैं उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा आने वाला है और ऐसे में हमारी लोक संस्कृति रीति रिवाज और प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करते हैं उन्होंने कहा कि साहित्य में सभी विषयों का मेलजोल होता है। इसमें सब कुछ उपलब्ध होता है। बस इसके लिए बिजन की जरूरत होती है। साहित्य में विश्व ग्राम की परिकल्पना जुड़ी है। अनुभूति जुड़ी है। साहित्य मानवीय मूल्य पर आधारित साहित्य के लिए संवाद जरूरी है। साहित्य सांस्कृतिक सीख का अनुवाद है। साहित्य सपने लेने सिखाता है।
उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार रोरिक गैलरी के क्रेटर सर्जिना जीने यहां पर जिस प्रकार कहां की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आज हम विश्व बंधुत्व पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने की कोशिश की कर रहे हैं उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गांव से शहर शहर से प्रांत प्रांत से राष्ट्र राष्ट्र से विभिन्न विदेश तक साहित्य के माध्यम से हम विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं उन्होंने कहा कि आज हम ग्लोबल विलेज की बात कर रहे हैं वह केवल सिद्धांत है उन्होंने कहा कि उन सिद्धांतों को व्यापारिकता के तौर पर परिणीति होते देख रहे हैं उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार मनुष्य मानवता एक दूसरे के भाषा को नहीं जानते लेकिन हृदय की भाषा को जानते हैं भाव और विचार के माध्यम से एक दूसरे से संवाद कर रहे हैं उन्होंने कहा कि संसार में बहुत सारी चीज बदली है लेकिन सारे मूल्य नहीं बदले हैं उन्हें कहा कि हमारे पुराने विचार विचार बदल जाते हैं लेकिन देवी देवताओं से संबंधित आस्था से जुड़ा हुआ और देवी देवताओं के प्रति आस्था जो है वह रहनी चाहिए और उसमें कोई अंधविश्वास नहीं है उन्होंने कहा कि आस्था ही सबसे बड़ा मूल्य है उन आस्थाओं को लेकर हम आगे बढ़ते हैं और हम उनको सुरक्षित रखते हैं।देवी देवताओं के प्रति आस्था के मूल्यों को जब आप अपनाते हैं और उनका संरक्षण करते हैं तो जीवन सरल शांति के साथ आगे बढ़ता है उन्होंने कहा कि रूपी सिराज कला मंच आज गांव गांव में रीति रिवाज परंपरा जीवित है उन्होंने कहा कि आज भी गांव में कोई भी व्यक्ति जाए और लोग उसे अतिथि देवो भव की तरह खाने पीने के लिए भी पूछताछ करते हैं हमने कहा कि मानवीय मूल्य है और इस तरह इन मूल्यों को हमको सुरक्षित रखना है और एक दूसरे के प्रति संवेदना जीवित रहे। देवभूमि कुल्लू में हम अतिथि को छोटी सी भेंट जरूर देते है और यही वह मानवीय मूल्य है जो आज भी हमारे हिमाचल प्रदेश में यहां के लोगों के द्वारा संजय रखा है उन्होंने कहा कि हमें आज किस आधुनिक युग में पैसा बहुत हो गया और ऐसे में यह जो मानवीय मूल्य उनको भूलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल के प्रसिद्ध साहित्यकार एसआर आरनोट उनकी बहुत सी पुस्तक अनुवाद के स्तर पर विदेश में अनूदित हो चुकी है उन्होंने कहा कि हिमाचल विश्वविद्यालय में भी उनके द्वारा लिखी पुस्तक पढ़ाई जाती है। उन्होंने कहा की उनकी पुस्तक कई भाषाओं में अनुवाद कर पढ़ाई जाती है।। प्रसिद्ध साहित्यकार से आरनोट शिमला के सुन्नी के थे वहां के परिवेश को जिस जीवनवत्ता से साथ उन्होंने दिया है और आज उनके द्वारा लिखी हुई पुस्तक के लोग पसंद करते हैं। बोलेरो कई साहित्यकार और विद्वान अपने वक्तव्य में साहित्य के प्रति संवेदना और हीनता आ रही है उसे पर प्रकाश डालेंगे उन्होंने कहा कि आज इस उद्घाटन सत्र में आठ गैलरी के क्यूरेटर मैडम सुरगेना और उनके पति जवित्री विदेशी साहित्यकार थे जिन्होंने अपना वक्तव्य दिया उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय बहूविषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी करीब 50 साहित्यकार भाग लेंगे और शोध पत्र पड़ेंगे जिसको एक किताब का रूप दिया जाएगा

रूपी सिराज कल मंच के अध्यक्ष डॉ दयानंद गौतम ने कहा कि जिला परिषद सभागार में रूपी सिराज कला मंच और भाषा विभाग के संयुक्त तत्वाधान में 3 दिवसीय बहुविषक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी साहित्य के विविध आयाम पर एक विमर्श की थीम पर आयोजित किया गया है उन्होंने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश भर के और विदेश के साहित्यकार विद्वान भाग ले रहे हैं और 3 दिनों तक यहां पर सभी साहित्यकार और विद्वान शोध पत्र पड़ेंगे और उसके बाद उसे एक किताब का रूप दिया जाएगा। अमेरिका की इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी में 12 विभिन्न विषयों पर पत्रपढ़ेंगे। जिसमें दीर्घकालिक जीवन व्यवस्था, हिमाचल के साहित्य में साहित्यकार, पर्यावरण ,यायवरी साहित्य अनुष्ठानिक क्रिया विधि हिमाचल के दैवीय शक्तियां

 

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