बनोगी में पंडीर ऋषि के सम्मान में की धान की रोपाई
देवता ने हारियानों के साथ धान रोपाई वाले खेतों में किया देवनृत्य

न्यूज मिशन
कुल्लू
देवभूमि कुल्लू में सदियों से देव परंपराओं का बखूबी निर्वहन किया जा रहा है। सैंज घाटी के बनोगी के खुना में शनिवार को देवता पंडीर ऋषि के सम्मान में धान की रोपाई (रुहणी) की गई। ढोल-नगाड़ों की थाप पर देवता पंडीर ऋषि के समक्ष यह परंपरा निभाई गई। देवता ने हारियानों के साथ धान रोपाई के वाले खेतों में देवनृत्य किया।
देवता पंडीर ऋषि के गूर किशोरी लाल ने कहा कि इस देव परंपरा को खुना रुहणी के नाम से जाना जाता है। पहले धान की रोपाई के लिए चार गांवों से 20 से 22 बैल की जोड़ी और 300 से अधिक महिलाएं आती थीं। कुल 500 बीघा भूमि में धान की खेती होती थी लेकिन अब धान के खेतों में लोगों ने सेब के बगीचे लगा दिए हैं। देवता पंडीर ऋषि के कारदार लोतम राम ने कहा कि देवता ने गूर के माध्यम से स्थानीय लोगों को इन पुरानी देव परंपराओं को भविष्य में भी कायम रखने को कहा है।
इस दौरान पंडीर ऋषि के कारकून भंडारी शेर सिंह, नाग के गूर तुलेराम, पुजारी रोशन लाल शर्मा, जेहर देवता के गूर नोक सिंह, चमन राणा, पंडीर ऋषि के सहायक गूर धनी राम, भैरव देवता के गूर किशोरी लाल सोनी, शहनाई वादक चंदेराम आदि उपस्थित रहे।



