कुल्लूधर्म संस्कृतिबड़ी खबरहिमाचल प्रदेश

मंडी चौहार घाटी के बड़ा देवता हुरंग नारायण लाव लश्कर के साथ अपने देवायलय हुए रवाना

सैकड़ो हारियानों के साथ 7 दिन के बाद पैदल सफर कर भु भू जोत लांघ कर पहुँचेगें देवालय वापिस

पूर्वजों ने मान्यता की थी कि अपने कुल देवता को अपने घर बुलांएगें-शक्ति सिंह
धार्मिक यात्रा में देवलू ढोल नगाड़ो की थाप पर नाच गाकर मना रहे खुशी
न्यूज मिशन
कुल्लू
जिला मंडी की चौहर घाटी के बड़ा देवता हुरंग नारायण इतिहास में पहली बार भु भू जोत लांघ कर लाव लश्कर के साथ कुल्लू पहुँचे थे। देवता हुरंग नारायण के मंडी से कुल्लू तक दर्जनों जगह पर भव्य स्वागत हुआ हैं।वहीं अव देवता 7 दिन के बाद कुल्लू से अपने देवालय वापिस रवाना हुए है। इस दौरान कुल्लू जिला मुख्यालय रथ मैदान में पहुंचने पर सैकड़ो श्रद्धालुओं ने देवता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद देवता हुरंग नारायण सैकड़ो हरियानों के साथ लगघाटी के लिए रवाना हुए।देवता आज शाम लगघाटी के कनौण में रात्री विश्राम होगा और कल सुबह देवता लाव लश्कर के साथ चादेवता हुरंग नारायण कमेटी के अध्यक्ष राजू ने बताया कि भुंतर के पिपलागे गांव में श्रद्धालु शक्ति शर्मा के निमंत्रण पर मंडी से कुल्लू पहुंचे थे, इस दौरान फिर देवता का शमशी, मोहल, बदाह जगह जगह स्थान पर भक्त जन के द्वारा बुलाया गया। जिस कारण से देवता को ज्यादा समय लगा। जहां पर 3 दिनों में देवता को वापस जाना था अव अधिक दिन हो गए है। उन्होंने कहा कि यह पूरी धार्मिक यात्रा के दौरान लगघाटी और कुल्लू-भुंतर में जगह-जगह पर देवता का स्थानीय लोगों ने भव्य स्वागत किया।
ठाकुर लालचंद ने बताया कि इतिहास में पहली बार देवता को हुरंग नारायण कुल्लू आए है।ं उन्होंने कहा कि देवता का छोटा भाई लगघाटी के गदीयाढ़ा में रहते हैं, उन्होंने कहा कि 70 के दशक में जब बारिश नहीं हुई थी तो देवता यहां से रूठ कर अपने बड़े भाई हुरंग के पास आए थे और देवता के हारयान 7 दिनों तक वहां बैठे थे फिर उसके बाद देवता को वापस लगघाटी को ले आए थे फिर देवता ने बारिश दे कर सुखे भी खत्म किया था। उन्होंने कहा कि कल्लू के इस यात्रा में लोगों ने देवता भव्य स्वागत किया और आदर मान दिया।
वीओ- शक्ति सिंह ने बताया कि उनके पिता चौहरघाटी के बटेड गांव से तीन पीढ़ी पहले कुल्लू में स्थानांतरित हुए थे। उन्होंने कहा कि और देवते के पास हर समय जाते रहते थे। 1974 से भूभू जोत होकर देवता हुरंग नारायण के पास दर्शन के जा रहे है। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने मान्यता की थी कि अपने कुल देवता को अपने घर बुलांएगें लेकिन उनसे यह हो नहीं सका। अपने भाईयों से भी अनुरोध किया कि अपने कुल देवता को घर ले आए लेकिन मेरे भाई भी राजी नहीं हुए और इसलिए मैंने खुद यह प्रण लिया मैं देवते को अपने घर बुलाऊंगा और इस बार मे देवते के आर्शिवादं से इसमें कामयाबी हुआ और देवते बुलाया। और देवते की बहुत अच्छी यात्रा रही और यह हमारा तीन दिन का सफर था।अव देवता अपने स्थाई निवास की ओर प्रस्थान हो रहे हैं सात दिन का सफर है आने जाने का और जिला कुल्लू के लोगों ने देवता का भव्य स्वागत किया और देवता से आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने घर के लिए सुख समृद्धि का आशीर्वाद भी प्रदान किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Trending Now