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लाहुल घाटी के अराध्य देवता राजा घेपन ने 84 दिनों की परिक्रमा पूरी
3 साल के बाद वर्ष 2026 में फिर घाटी की करेंगे परिक्रमा

·न्यूज मिशन
केलांग
लाहुल के आराध्य देवता राजा घेपन , देवी बोटी व राजा घेपन की माता जंगडुल 12 सप्ताह तक लाहुल परिक्रमा के बाद सोमवार को अपने अपने देवलाय मे विराजमान हो गए। गत 20 अक्तूबर को राजा घेपन, देवी बोटी सहित शूलिंग के मोगर देवता, रालिंग के ड्राबला, खले के लुंगखोरबल, ट्रिलिंग के शलवर, गोंधला के मेलंग तेते, सक्कर के नागराजा के रथ देवलुओं द्वारा तैयार किया गया था, जबकि 21 को सभी देवगण सक्कर के गुंचलिंग में देव मिलन हुआ था। इसके बाद तीन दिन बाद देवी बोटी, माता जंगडुल और राजा घेपन के रथ यात्रा शुरू हुए थे। इस यात्रा में देवी बोटी के 42 देवलू और राजा घेपन के 33 के करीब देवलुओं ने गुर टशी , पुजारी , पडिंत तथा अन्य कारकूनों ने 83 दिनों तक लाहौल के गुंचलिंग से लेकर त्रिलोकीनाथ मंदिर सहित उदयपुर के माता मृकुला मंदिर से कोकसर तक भ्रमण किया और यहां से वापिस होकर परिक्रमा करते हुए 82 दिन बाद के बाद रविवार को शाशिन थान से अलग होकर आने देवलाय लौटे, जिन्हें सोमवार को पूजा अर्चना के बाद देवलाय विराजमान हुए। वहीं रविवार की सुबह 10 बजे देवताओं के विदाई दृश्य को देख कर सेंकडों श्रद्धालुओं की आंखे नम हो गई। राजा घेपन कमेटी के अध्यक्ष गोविंद ने बताया कि लगभग 12 सप्ताह के परिक्रमा के बाद सोमवार को सभी देवी देवता अपने अपने देवस्थल विराजमान हुए। कहा कि आगामी 2026 को अक्तूबर महीने के तीसरे सप्ताह में निश्चित तिथि और वार देखकर राजा घेपन सहित चंद्राघाटी के अन्य देवगण फिर से गुंचलिंग में एकत्रित होंगे और देवी देवताओं का महा मिलन के बाद राजा घेपन की परिक्रमा होगी। वहीं जगदंग पूणा में राजा घेपन अपने गुर के माध्यम से साल भर की भविष्यवाणी भी करेंगे।



