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सूत्रधार कला संगम भारतीय संस्कृति और लोक संस्कृति के संरक्षण संवर्धन के लिए कर रहे सराहनीय प्रयास-संदीप मोहला

कहा- दर्जनों प्रशिक्षुओं कलाकारों ने शास्त्रीय गायन,वादन व नृत्य में बेहतरीन प्रस्तुति

देवसदन के सभागार में 18 वॉ सूत्रधार गुरू पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया

न्यूज मिशन
कुल्लू
कुल्लू जिला के देवसन के सभागार में 18 वां सूत्रधार “गुरू पूर्णिमा महोत्सव” धूमधाम के साथ  मनाया। इस कार्यक्रम पार्वती हाईड्रो प्रोजेक्ट के हैड संदीप मोहला ने बतौर मुख्यातिथि और राजीव सूद ने बिशेष आतिथि शिरकत की।सूत्रधार कला संगम के अध्यक्ष दिनेश सेन ने मुख्यतिथि और बिशेष आतिथियोंका शॉल टोपी स्मृति चिंह भेंट कर स्वागत किया।कार्यक्रम में शास्त्रीय गायन, वादन व नृत्य की बेहतरीन  प्रस्तुती दी गई। जिसमें  प्रशिक्षु कलाकारों रंगारंग  सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
अध्यक्ष दिनेश सेन ने जानकारी देते हुए कहा कि इस बार “गुरू पूर्णिमा महोत्सव” देवसदन कुल्लू के सभागार में मनाई गई।उन्होने ने बताया कि गुरू पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से शिष्यों द्वारा उनके गुरू के सम्मान में समर्पित होता है, इसी कड़ी में सूत्रधार संगीत अकादमी के प्रशिक्षु भी अपने गुरू पं० विद्यासागर शर्मा के सम्मान में समर्पित इस कार्यक्रम में गीत संगीत व नृत्य की प्रस्तुतियां दी। पं० विद्यासागर शर्मा जोकि जून 2005 से सूत्रधार कला संगम में बतौर प्रधानाचार्य प्रशिक्षुओं को शास्त्रीय नृत्य, संगीत व वादन की शिक्षा निरंतर प्रदान कर रहे।
पार्वती हाईड्रो प्रोजेक्ट के हैड संदीप मोहला ने कहा कि टीवी पर चलचित्रों में पाश्चातापिय संस्कृति से उत्प्ररित हो रहे है युवा पीढ़ी उसी तरफ आर्कषित हो रहे है । लेकिन कुल्लू में नौजवान पीढ़ी भारतीय संस्कृति के सरंक्षण संर्वधन के लिए सूत्रधार कला संगम के द्वारा सराहनीय कार्य कर रहे है।उन्होंने कहाकि गुरू पूर्णिमा के अवसर पर सूत्रधार के प्रशिक्षुओं के द्वारा शास्त्रीय गायन वादन और नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुति दी है।उन्होंने कहाकि पंडित विद्याधर के द्वारा प्रशिक्षुओं को अथक प्रयासों से प्ररेणा के साथ भारतीय संस्कृति के सरंक्षण पर कार्य रहे है।उन्होंने कहाकि पूरे देशभर में सूत्रधार का नाम रोशन जिससे यह निरंतर आगे बढ़े।
प्रशिक्षु संजय और संदीप ने कहा कि गुरू पूर्णिमा के उपलक्ष पर गुरू के सम्मान में हर साल सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन  किया जाता है।उन्होंने कहाकि गुरूका जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है ऐसे में प्रशिक्षुओं को आगे बढ़ने के लिए गुरू से प्ररेणा मिलती है।उन्होंने कहाकि गुरू की आर्शिवाद से संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे है।

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