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केंद्र सरकार लद्दाख में लोकतंत्र की बहाली करें-सोनम वांगचुक
कहा-लद्दाख और हिमालया के पर्यावरण संस्कृति के संरक्षण सुरक्षा को लेकर लदाख से दिल्ली तक पदयात्रा

लेह लद्दाख से शुरू हुईपर्यावरण विद सोनम वांगचुक की पदयात्रा पहुंची कुल्लू सैकड़ो लोगों ने किया स्वागत
न्यूज मिशन
कुल्लू
लद्दाख से दिल्ली की पदयात्रा को लेकर पर्यावरण विद् सोनम बांगचुक सहित सैकड़ो कुल्लू पहुंचे कुल्लू पहुंचने पर पर्यावरण विद् सोनम बागचुक और लद्दाख के लोगों का स्थानीय लोगों ने भव्य स्वागत किया इस दौरान कुछ देर के लिए सोनम बांगचुक और लद्दाख के लोग कुल्लू में रुके उसके बाद कुल्लू से पदयात्रा भुंतर की तरफ रवाना हुई इस दौरान पर्यावरण विद् सोनम बागचुक ने कुल्लू में पत्रकारों को संबोधित किया
पर्यावरण विद सोनम वांगचुक ने कहा कि यह यात्रा 1 सितंबर को लेह से दिल्ली के लिए चली थी जिसमें सैकड़ो लोग शामिल थे उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे इस यात्रा में लोगों का भरपुर सहयोग मिल रहा है और सैकड़ो लोग इसमें शामिल हो रहे हैं उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य लद्दाख, हिमालया के पर्यावरण और संस्कृति के संरक्षण सुरक्षा है। उन्होने कहाकि जिस प्रकार पर्यावरण को नुकसान पहुंचा जा रहा है से हानि पहुंच रही है और हमें भी हानि पहुंच रही है जिस तरह से बाढ़ आ रहे हैं कहीं अकाल पड़ रहा है कहीं ग्लेशियर हमारे पिघलते जा रहे हैं तो ऐसे में हर तरह के प्रावधान हर औजार के साथ हिमालय की संरक्षण करने की जरूरत है और हिमालय में भी जो उच्च हिमालय है लद्दाख की तरह जहां पर सारे ग्लेशियर से उनकी तो लद्दाख में संविधान का जो अनुच्छेद 144 में शेड्यूल है शेड्यूल वह ऐसी संरक्षण देती है स्थानीय जनजातीय जो जनता है उन्हें अपने इलाके का प्रबंध पुट करने के मगर उसकी जो आश्वासन सरकार से मिली है उसे पर अमल नहीं हुआ है इसमें सारे चुनाव घोषणा पत्रों में इतनी पहल
बिंदु और फिर उसके बाद उसे पर बात नहीं हुई और जो बातचीत हो रही थी सरकार और लद्दाख के नेताओं में वह भी रुक गया तो हम प्रवचन और यह बातचीत दोबारा चले तो यह है स्थानीय स्तर पर लगा या हिमाचल या पूरे हिमालय का संरक्षण पर हम चाहते हैं कि देश में सत्य की मूल्य रहे वचनों का कीमत रहे तो जो चुनाव में वचन दिए जाते हैं यही याद दिला दीजिए यात्रा कर रहे हैं फिर विश्व के स्तर पर जिस तरह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है जिसका असर तो हर जगह हो रहा है और और ज्यादा होगा पहले मैं बहुत ही तीव्र देखा जा रहा है तो उसमें हमें बहुत जरूरी है कि सिर्फ सरकार से नहीं लोगों से भी नागरिकों से भी हम अपील करें कि वह भी ऐसा जीवन जीए जो की प्रकृति को हानि न पहुंचाएं शहरों में जो पहाड़ों में रहने वालों करते हैं और पहाड़ों में फिर चाहे वह लिथियम का हो या गोल्ड सिल्वर जिसका भी हो या फिर उनके लिए जो बिजली की जरूरत है वह हिमाचल में जल परियोजनाएं बनकर आती हैं हाइड्रो प्रोजेक्ट लद्दाख में वह चिरागों पर सोलर पावर प्रोजेक्ट बनकर आते हैं तो यहां के लोग कहीं डूबते हैं तो कहीं विस्थापित होते हैं तो ऐसी चीजों से रोकने के लिए सिर्फ सरकार ही नहीं शहरों में रहने वाले लोगों को भी ऐसी जीवन जीने चाहिए कि वह अपने जो प्रयोग है वह कम करें आदि करें बिजली का या अन्य उत्पादों का तो हमारे पहाड़ हमारे जीवन हमारी संस्कृति भी बच पाए तो यह हमारे मुख्य दो हैं संरक्षण हिमालय का लद्दाख का और फिर विश्व के स्तर पर लोगों से अभी और लद्दाख में लोकतंत्र की बहाली क्योंकि जब से यूटी बने लद्दाख में कोई लोकतांत्रिक मंच नहीं है ना मला है ना लेजिसलेटिव असेंबली है तो ऐसे में अफसर निर्णय करते हैं कि लद्दाख की क्या विकास हो और यह अफसर जो है वह दो-तीन साल के लिए आते हैं तो इतना तो उन्हें समझने में लग जाता है तो ऐसे तो हिमालय और भी बिगड़ेगा और उसका खामियाजा यहां के लोगों को वीडियो तक सहनी पड़ेगी तो यह हमारे मुद्दे हैं फिर बाकी युवाओं की रोजगार की बात है 5 सालों में कोई नियुक्ति नहीं हुई है। कहां की केंद्र सरकार ने जो चुनाव के समय जनता से बातें किए हैं उनका पूरा करें और लद्दाख के युवाओं और देश के युवाओं की उम्मीद पर केंद्र सरकार खरा उतरे।



