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भगवान राम,माता सीता, हनुमान,शालिग्राम, नरसिंह भगवान की हार श्रृंगार के साथ हुई विधिवत मध्याहन पूजा अर्चना
अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा देव महाकुंभ में देवी देवताओं के दर्शनों के लिए उमड़ रही श्रद्वालुओं की भीड़
न्यूज मिशन
कुल्लू
अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दूसरे दिन ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में सभी देवी देवता अस्थाई शिविरों में पारंपारिक बाद्ययंत्रों की देवधूनों के साथ विधिवत पूजा अर्चना हुई। देवी देवताओं को भोग प्रसाद लगाया और सुबह की आरती हुई। देवी देवताओं के अस्थाई शिविर में दर्शन के लिए श्रद्वालुओं की भीड़ उमड़ रही है। वहीं भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर में प्रात पूजा के बाद मुख्य छड़ी बरदार महेश्वर सिंह व पूजारियों ने मत्रोंउच्चरण के साथ दूध्र, दही, शहद, पानी व पंच अमृत, घी, शक्कर, तुलसी जल के साथ विधिवत स्नान, सफेद वस्त्र, चंदन व कुमकुम के तिलक लगार व सोने चांदी के गहने की माता के हार श्रृंगार किय कर भगवान रघुनाथ, माता सीता नरसिंह भगवान, शालिग्राम ,हनुमान को गद्दी बैठकर विभिन्न प्रकार फूलों के साथ गद्दी साजसजावट की। मंत्रोउच्चरण के साथ 10 वर्णनों में पुष्प अर्पित किए।उसके बाद धूप,दीप से अर्पित किए भगवानों लुवी व फल फरूट का भाग लगाया। जिसके बाद जुड़ी बुटियों से हवन यज्ञ कर भगवान को अष्टा लगाया जिसके भगवान की आरती हुई । मुख्य छड़ी बरदार महेश्वर सिंह भगवान को पुष्पमाला अर्पित की जिसके बाद भगवान को गर्भगृह में बैठया गया। जिसके साथ मध्याहन पूजा संपन हुई।
अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दूसरे दिन ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में सभी देवी देवता अस्थाई शिविरों में पारंपारिक बाद्ययंत्रों की देवधूनों के साथ विधिवत पूजा अर्चना हुई। देवी देवताओं को भोग प्रसाद लगाया और सुबह की आरती हुई। देवी देवताओं के अस्थाई शिविर में दर्शन के लिए श्रद्वालुओं की भीड़ उमड़ रही है। वहीं भगवान रघुनाथ के अस्थाई शिविर में प्रात पूजा के बाद मुख्य छड़ी बरदार महेश्वर सिंह व पूजारियों ने मत्रोंउच्चरण के साथ दूध्र, दही, शहद, पानी व पंच अमृत, घी, शक्कर, तुलसी जल के साथ विधिवत स्नान, सफेद वस्त्र, चंदन व कुमकुम के तिलक लगार व सोने चांदी के गहने की माता के हार श्रृंगार किय कर भगवान रघुनाथ, माता सीता नरसिंह भगवान, शालिग्राम ,हनुमान को गद्दी बैठकर विभिन्न प्रकार फूलों के साथ गद्दी साजसजावट की। मंत्रोउच्चरण के साथ 10 वर्णनों में पुष्प अर्पित किए।उसके बाद धूप,दीप से अर्पित किए भगवानों लुवी व फल फरूट का भाग लगाया। जिसके बाद जुड़ी बुटियों से हवन यज्ञ कर भगवान को अष्टा लगाया जिसके भगवान की आरती हुई । मुख्य छड़ी बरदार महेश्वर सिंह भगवान को पुष्पमाला अर्पित की जिसके बाद भगवान को गर्भगृह में बैठया गया। जिसके साथ मध्याहन पूजा संपन हुई।
भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबार महेश्वर सिंह ने कहाकि भगवान रघुनाथ की पूजा पद्वति हमारे पूर्वज राजा जगत सिंह के समय में दामोदर गुसाई ने अयोध्य से हस्त लिखित पद्वति लाई थी जो हमारे कुल्लू के लिए गर्व का बिषय है और राम जन्म भूमि में यह पूजा पद्वति नहीं है।उन्होंने कहाकि यह मूर्तियां अश्वमेघ यज्ञ हुआ था और इसलिए यह यज्ञ मुद्रा में कमल आसान की तरह है अंगुष्ट मात्र है। उन्होंने कहाकि प्राचीन काल में इस तरह का दशहरा उत्सव मनाया जाता था। सिर्फ देवी देवता की धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया जाता था।उन्होनें कहाकि इस बार के दशहरा उत्सव में बड़ी संख्या में देवी देवता देवमहाकुंभ में पहुंचे है।देवता श्रृुुंगा ऋषि के पुजारी जितेंद्र शर्मा ने कहाकि देवता के अस्थाई शिविर में 7 दिनों तक सुबह शाम विधिवित पूजा अर्चना होती रहेगी।उन्होंने कहाकि दूर दराज से श्रद्वालु देवता के दर्शन के लिए पहुंचे है और यहां पर विधि विधान के साथ पूजा अर्चना होती है।उन्होंने कहाकि देवता से समस्याओं के समाधान प्रशनों के माध्यम से होगा।उन्होंने कहाकि सुबह शाम पूजा अर्चना में श्रद्वालुओं की भीड़ उमड़ी है। और देवता से आर्शिवाद लेते है।



