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देवभूमि कुल्लू के दरपोईन धार्मिक काहिका उत्सव में हुआ देव परंपराओं का निर्वहन

दैवीय शक्ति से मुर्छित नंड हुआ जीवित

महाराजा कोठी क्षेत्र में सुख शांति के लिए 5 बर्षो के बाद होता है दरपोईन धार्मिक काहिका उत्सव
हजारों लोगों ने देवता जम्दग्नि से लिया आर्शिवाद
एंकर
देवभूमि कुल्लू जिला के महाराजा कोठी में दरपोईन धार्मिक काहिका उत्सव में धूमधाम के साथ मनाया। देवता जम्दग्नि के प्रांगण में 4 दिनों तक धार्मिक काहिका उत्सव शानिवार दोहपर को संपन्नहुआ। जिसमें 18 अगस्त को नड़ बदाह यानि नड़ मारने की अहम रस्म निभाई गई।साथ ही देवी देवताओं की शक्ति की भी परीक्षा ली गई। मुर्छित अवस्था में  नड़ को चेतनावस्था में लाने की जिम्मेदारी देवताओं की होती है।
धार्मिक काहिका उत्सव मेंं नड़ की भूमिका बाले अशोक कुमार ने कहाकि दैवीय शक्ति के नड़ मुर्छित होता है और उसके बाद पुनः चेतानावस्था में लाया जाता है।जिसमें देवी देवता के गुर देवशक्ति से नड़ को जीवित किया।उन्होंने कहाकि काहिका उत्सव में ढालपुर के देवता वीरनाथ गौहरी, नैना सैरी के देवता वीर  वराधी, लोट के देवता वीर, दरपोईन की माता जोगणी ओर स्थानीय देवता महर्षि जम्दग्नि ने हिसा लिया।
काहिका उत्सव में लगघाटी के भुटटी गांव के नड़ जाति का व्यक्ति अशोक की मुख्य भूमिका निभाते है। अशोक को देवता मुर्छित और फिर देव शक्ति के वल पर ही नड़ को जिंदा हुआ। नड़ को मुर्छित  करने के लिए देवता जम्दग्नि के कारदार चारों दिशाओं मे तीर मार कर मुर्छित किया गया और देवता के मन्दिर के चारों आर तीन चक्कर लगा कर नड़ को पुनः दैविय शक्ति से जीवित किया गया। काया यज्ञ पाप का प्रायश्चित और व्याधियों को शमन करता है। लोक मान्यता है। कि जव भी किसी क्षेत्र में पाप की अधिकता हो जाती है। तो उसे पाप के खात्में के लिए काहिका का आयोजन किया जाता है। इसमें नड़ क्षेत्र में व्याप्त पाप की गठरी को स्र्वलोक में ले कर जाता है, और बहां पहुंचाकर वापस आता है। यदि पाप की गठरी भारी हुई तो उसे उठाते-उठाते नड़ के प्राण भी जा सकते हैं।काहिका अवधि कहीं यह तिथि देवता की इच्छा पर निर्भर करती है।
देवता वीरनाथ गौहरी के कारदार राज कुमार ने कहाकि दरपान काहिका उत्सव में प्राचीन परंपरा निभाते है।उन्होंने कहाकि देवता वीरनाथ गौहरी और माता फूंगणी जोगणी के द्वारा मुर्छित नड़ को जीवित करते है।उन्होंने कहाकि क्षेत्र की सुख शांति के लिए धार्मिक काहिका उत्सव देव मिलन का कार्यक्रम होता है।
स्थानीय देव कारकून दियाल  ठाकुर ने कहाकि दरपोईन काहिका धार्मिक उत्सव 4 दिनों का होता है जिसमें देवता महर्षि  जम्दग्नि ,देवता वीरनाथ गौहरी और देवता वीर लोट नैनासेरी का मुख्य रोल रहता है।उन्होंने कहाकि हारयानों की भलाई के लिए हर 5 बर्षो के बाद काहिका उत्सव का आयोजन होता है।उन्होंने कहाकि हारयानों के द्वारा देवता के देवलुओ को खाने पीने की व्यवस्था करते है।
-स्थानीय श्रद्वालुओं सौरभ महंत ने कहाकि दरपोईन काहिका उत्सव 4 देवी देवता भाग लेते है और धार्मिक उत्सव में मुर्छित नड़ को दैविय शक्तियों से असुरी शक्तियों का नाश होता है।उन्होंने कहाकि मेला
3 दिनों तक धूमधाम के साथ मनाया जाता है जिसमें पहले दिन सभी देवता देवता अपने स्थान से देवता महर्षि  जम्दग्नि के पंरागण में पहुंचते है और 2 दिन देवता के धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है।

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