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सरकार ने उपकरणों व दवाईयों पर जी एस टी लगाकर बागवानों की तोड़ी कमर- गुरजीत सिंह गिल

कहा- आढतियों द्वारा सेब की पेटी में दो किलो की काट को तुरन्त किया जाए बन्द

बागवानों की मेहनत से प्रदेश में 55 हजार करोड़ आर्थिकी पहुंची 
न्यूज मिशन
कुल्लू
सेब उत्पादक संघ कुल्लू ने जिला मुख्यालय उपायुक्त कार्यालय पर अपनी मांगो को लेकर धरना प्रदर्शन किया। धरने को सबोधित करते हुए सेब उत्पादक सघ कुल्लू के संयोजक गोविन्द भण्डारी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अन्दर सेब की आर्थिकी आज लगभग 55 हजार करोड की हैं लाखो लोग इस व्यवसाय से अपनी अजिविका कमाते है। परन्तु आज के समय के सरकार की बागवानी विरोधी नीतियों के चलते सेब की खेती गहरे संकट व घाटे में जा रही है। सेब उत्पादन में लागत बढने से बागवानों को उवित मूल्य नहीं मिल रहा है। आज के समय में सेब बागवानी में उपयोग होने वाले उपकरण पावर स्प्रै, कार्टन ,टे टीलर, एण्टी हैल्नेट की कीमतों में लगातार बढौतरी हो रही है साथ ही सरकार ने इन उपकरणों व दवाईयों पर जी एस टी लगाकर बागवानों की कमर तोड दी है। सव्जी मण्डियों में एपीएमसी कानून को सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा है मनमाने ढंग से आढतियों व व्यापारियों के द्वारा क्रेट का बजन 3 किलो तथा लेवर चार्जिज 10 रूपये प्रति क्रेट लिए जा रहे हैं। जो कि बागवानों की सीधी लूट है। और सरकार व एपीएमसी मूकदर्शक बनकर रह गई है।धरने को सम्बोधित करते हुए सेब उत्पादक संघ कुल्लू खण्ड के संयोजक गुरजीत सिंह गिल ने कहा कि आज पूरे हिमाचल प्रदेश में खण्ड स्तर पर सेब उत्पादकों द्वारा प्रदर्शन किये जा रहे हैं तथा मुख्यमन्त्री को ज्ञापन दिए जा रहे हैं उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी कश्मीर की तर्ज पर मण्डी मध्यस्ता योजना के तहत सरकार द्वारा ए ग्रेड 80 रूपये , वी ग्रेड 60रूपये तथा सी ग्रेड 30 रूपये प्रति किलो के हिसाव से खरीदा जाए। और हर व्लॉक में सीए स्टोर का निर्माण किया जाए तथा सेव आधारित उद्योगों की स्थापना की जाए। प्रदेश में यूनिवर्सल कार्टन लागू किया जाए। विदेशों से आयात किए जा रहे सेवों पर आयात शुल्क 100 प्रतिशत किया जाए। धरने के वाद जिलाधीश कुल्लू के माध्यम से मुख्यमन्त्री को ज्ञापन दिया गया जिसमें निम्न मांगे रही। एपीएमसी एक्ट 2005 को सही तरह से लागू किया जाए। लीगल मैट्रोलॅाजी एक्ट सही तरह से लागू किया जाए। माल भाड़ा को एक्ट के तहत रेगुलेट किया जाए। सेब के भाडे को वजन व दूरी के आधार पर  तय किया जाए। युनिवर्सल कार्टन को लागू किया जाए। सेब की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले कार्टन टेप, मशीन व अन्य उपकरणों पर लगने वाले जीएसटी को समाप्त किया जाए। अमेरिकन सेब पर आयात शुल्क को 100 प्रतिशत किया जाए तथा इसके मुक्त व्यापार सन्धि एफ टी ए से बाहर किया जाए। सेब के लिए एमआईएस ए ग्रेड-80 रूपये, बी ग्रेड-60, सी ग्रेड-30 रूपये समर्थन मूल्य घोषित किया जाए। किसान सहकारी समितियों को सी ए स्टोर बनाने के लिए 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाए। निजी कम्पनियों द्वारा लगाए गए सी ए स्टोर में बागवानों को 25 प्रतिशत हिस्से में सेब रखने के प्रावधान को सख्ती से लागू किया जाए। बागवानी में इस्तेमाल किए जाने वाले स्प्रे मशीन, पावर टिलर, एन्टी हेल्नेट आदि की वर्षों से लम्बित सव्सिडी तुरन्त प्रदान की जाए। आढती व खरीददारों के पास बागवानों के बकाया पैसे का तुरन्त भुगतान करवाया जाए। बागवानों से बिना सहमति के फसल बीमा योजना के तहत काटे जा रहे प्रीमियम को तुरन्त बन्द किया जाना चाहिए और जिसका प्रीमियम काट दिया गया है उसका प्रीमियम वापिस किया जाना चाहिए। साथ ही ओलावृष्टि , वर्फबारी व अन्य प्राकृतिक नुकसान का मुआवजा समय पर दिया जाए। एपीएमसी व हिमफैड द्वारा बागवानों से लिए गए सेब की बकाया राशि का तुरन्त भुगतान किया जाए। बागवानों से प्रदेश के बिभिन्न बैरियरों पर ली जाने वाली अवैध वसूली बनद की जाए। सेब को क्रेट में बेचने पर 3 किलो की काट बन्द की जाए केवल क्रेट में मौजूद वास्तविक वज़न को ही काटा जाए। आढतियों द्वारा सेव की पेटी में दो किलो की काट को तुरन्त बन्द किया जाए। बागवानो द्वारा बिभिन्न बैंकों व अन्य संस्थाओं से लिए गए ऋण को माफ किया जाए। प्रत्येक खण्ड में पतियां व मिटटी की जांच केन्द्र को स्थापित किया जाए। सघन खेती के लिए मिलने वाली सव्सीडी व अन्य लाभों के लिए छोटे व मध्यम किसानों को भी जोडा जाए। सेब के स्प्रे शैडयूल के हिसाव से सव्सीडी की दवाईयां उपलव्ध करवाई जाऐं।प्रदर्शन में कुल्लू खण्ड के सह संयोजक राम लाल, नगर खण्ड के संयोजक अनिल कुमार बरिष्ठ बागवान नेता मोहन लाल, देव राज नेगी ,चमन लाल, देव राज, सन्तोष कुमार, केहर सिंह, ढुगले राम, गम्भीर सिंह, राम दयाल, खेम सिंह, पूर्ण चन्द आदि सैंकडों बागवान मौजूद रहे।

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