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27 सितंबर को फिर बैठेगी सब कमेटी, 28 को कैबिनेट में फैसला

फोरलेन के चार गुना मुआवजे पर मंत्रिमंडल लेगा आखिरी निर्णय

 

न्यूज़ मिशन

शिमला
हिमाचल प्रदेश सरकार ने 30 हजार से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए पॉलिसी लाने के मामले में बात बन गई है। शुक्रवार को सचिवालय में कैबिनेट सब कमेटी के अध्यक्ष एवं राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह की अध्यक्षता में सब कमेटी की बैठक हुई, जिसमें सेक्रेटरी लॉ और स्पेशल सेके्रटरी फाइनांस भी मौजूद थे। इस बैठक में आउटसोर्स कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी देने और आउटसोर्स की व्यवस्था से निजी कंपनियों को बाहर करने को लेकर सहमति बन गई है। हालांकि कैबिनेट सब कमेटी 27 तारीख को फाइनल बैठक करेगी, क्योंकि दो बिंदुओं पर दो विभागों को अपनी रिपोर्ट देनी है। इसके बाद 28 सितंबर को होने वाली कैबिनेट की बैठक में मंत्रिमंडल पॉलिसी पर फैसला लेगा। कैबिनेट सब कमेटी की बैठक के बाद कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र सिंह मंडी रवाना हो गए थे। सचिवालय में मौजूद सब कमेटी के मेंबर और शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी देने को लेकर सहमति बन गई है, लेकिन कुछ बिंदुओं पर कमेटी ने और प्वाइंट मांगे हैं।*

यही वजह है कि 27 सितंबर को एक बार फिर कमेटी बैठेगी और 28 को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान सब कमेटी इस बात पर भी सहमत है कि आउटसोर्स को लेकर निजी कंपनियों को यदि बीच में से हटा दिया जाए, तो राज्य सरकार पर भी कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स सिस्टम भारत सरकार और हिमाचल सरकार में रहेगा, लेकिन इन कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा कैसे दी जाए, यह महत्त्वपूर्ण है। हिमाचल में बन रहे फोरलेन से प्रभावित हुए लोगों को दोगुने के बजाय चार गुना मुआवजा देने के मामले में भी कैबिनेट सब कमेटी ने अपनी सिफारिशों को फाइनल कर लिया है। इस बैठक में मेंबर दो अन्य मंत्री शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर और वन मंत्री राकेश पठानिया भी मौजूद थे। प्रभावितों को बैक डेट से चार गुना मुआवजा देने पर सहमति तो बनी है, लेकिन यह चुनिंदा क्षेत्रों में ही होगा। सभी प्रभावितों के लिए एक समान फार्मूला नहीं होगा। यह सिफारिश भी कैबिनेट में ही सब कमेटी ने रखनी है और 28 सितंबर को ही इस पर फैसला होना है। दो रोज पहले फोरलेन प्रभावित संघर्ष समिति के संरक्षक ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने भी सरकार के सामने यह मामला नए सिरे से रखा था।

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